अमरोहा। बीते छह दिन में लापता महिला सहित दो की हत्या से जिला थर्रा गया है। पुलिस की सक्रियता से दोनों घटनाओं का पर्दाफाश हो गया। हत्यारोपी सलाखों के पीछे हैं, लेकिन इससे पहले भी जिले में चालीस से अधिक परिवार ऐसे हैं, जो अपनों की राह ताक रहे हैं। पुलिस के रिकार्ड में सभी की गुमशुदगी जरूर दर्ज है पर फाइलें फिलहाल ताक पर रखीं हैं। लापता में तेरह बच्चे भी शामिल हैं। इनमें से दस की वापसी हो गई, लेकिन अन्य गायब बच्चों की माताएं अपने लाल के आने की राह हर दिन देखती है।
पुलिस के आंकड़ों पर ही विश्वास करें तो वर्ष 2020 और 2021 में अब तक जिले में कुल 184 गुमशुदगी दर्ज हैं। जिसमें से 130 लोगों की वापसी हो गई है। जबकि लापता होने के बाद 10 ऐसे लोग हैं, जिनकी हत्या कर दी गई। परिजनों को उनकी लाश ही मिल सकी। जबकि शेष 44 गुमशुदा की तलाश नहीं हो पाई है। लापता लोगों में 13 बच्चे 18 साल से कम उम्र के हैं। इनमें से 10 की वापसी हो चुकी है और तीन अभी भी लापता चल रहे हैं। पुलिस लगातार होने वाली घटनाओं को लेकर भी गंभीर नहीं हैं। हालात ये हैं कि जनपद में पिछले छह दिन के भीतर लापता महिला समेत दो लोगों की हत्या कर दी गई। जिसमें रजबपुर थानाक्षेत्र के फैयाजनगर निवासी राजेश देवी छह दिन पहले से लापता थीं, पुलिस ने मामले में गुमशुदगी दर्ज की और बाद में पड़ोसी के घर के टॉयलेट के टैंक से शव बरामद हुआ। जबकि तीन दिन पहले लापता हुए रुकमेश की हत्या कर उसके शव को बोरे में बंद कर गन्ने के खेत में दबा दिया गया। उसका शव सोमवार को हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के रूखालू गांव के जंगल से बरामद हुआ है। गनीमत रही दोनों परिवारों के परिजन लगातार प्रयासरत थे, वरना यह दोनों मामले भी पुलिस के गुमशुदगी रिकार्ड में गुम होकर रह जाते।
पड़ोसी जिलों को सूचना देने में भी लापरवाही
अमरोहा। गुम हुए बच्चों की तलाश के लिए नियमों में पड़ोसी जिलों के थानों को भी सूचना देना शामिल है। लेकिन पुलिस यहां पर भी लापरवाही कर जाती है। गुम हुए लोगों की तलाश में पड़ोसी जिलों तक को सूचना नहीं दी जाती।
पुलिस से छोड़ी उम्मीदें
अमरोहा। परिजनों की पहले तो गुमशुदगी बमुश्किल लिखी गई। अब पुलिस बच्चे की तलाश करने के नाम पर कहती है कि पर्चे छपवा लाओ। अखबार में निकवाओ। लेकिन बच्चों की तलाश में पुलिस ने आसपास के थानों और जिलों को हुलिया का मैसेज तक नहीं किया है। ऐसे में परिजन हार मानकर बैठ गए हैं और खुद बच्चों के लौट आने का इंतजार कर रहे हैं।
परिजनों से ही खर्च कराती है पुलिस
अमरोहा। पुलिस के रिटायर्ड अधिकारी ने बताया कि गुमशुदा की तलाश के लिए पुलिस को बजट मिलता है। लेकिन पुलिस खुद रकम खर्च करने के बजाय परिवार के लोगों पर खर्च का बोझ डाल देती है। पुलिस सिर्फ गुमशुदगी दर्ज करके बैठ जाती है। पर्चे छपवाने के नाम पर या दूसरे जिलों में खोजने के नाम पर खर्च के रुपये मांगे जाते हैं।
बच्चों के संबंध में गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देश
- सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2000 के अंतर्गत खोये बच्चों के संदर्भ में तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दे रखा है।
- सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक खोए बच्चों के मामले में हर राज्य में डीआईजी स्तर का अधिकारी नोडल अफसर होगा और बच्चों के संदर्भ में की जा र ही कार्रवाईयों की निरंतर समीक्षा और निगरानी करेगा।
- ऐसे मामलों की तहकीकात डिप्टी एसपी या एडिशनल एसपी स्तर से कम का अधिकारी नहीं करेगा।
- राज्य अपराध शाखा खोए बच्चोें के लिए बनाई गई। जिला स्तरीय समिति से तालमेल बनाकर रखेगी। इस संदर्भ में कहीं भी किसी बच्चे के पाए जाने पर जिला स्तर की सूची और फोटो से मिलान करेगी। इसके लिए मिसिंग पर्सन स्क्वॉड बनाया गया है।
- बच्चों का धंधा करने वाले गैंग का रिकार्ड और पूरा विवरण थाना स्तर पर मेंटेन रखने का निर्देश है।
- खोए बच्चों के मामले में पुलिस की संवेदनशीलता बनाए रखने के लिए पुलिस ट्रेनिंग कॉलेजों के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्देश है।
- जिला स्तर पर एसपी और महानगरों में पुलिस कमिश्नर स्तर का अफसर अपनी मासिक अपराध समीक्षा में खोए बच्चों की समीक्षा करेगा।
बयान
- गुमशुदगी के आधार पर लोगों की तलाश के लिए पुलिस लगातार प्रयासरत है। लेकिन अब सीओ क्राइम को इसकी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, कि वह ऐसे लोगों की तलाश के लिए टीम बनाकर काम करेंगे।-पूनम, एसपी अमरोहा