बदायूं में तैनात महिला कांस्टेबल की मां से लूट का पुलिस ने चार दिन के भीतर पर्दाफाश कर दिया। झोलाछाप ने अपने दोस्त के साथ मिलकर लूट की थी। उधार के रुपये चुकाने और शौक पूरे करने के लिए वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है।
उनके कब्जे से 25 हजार रुपये की नगदी व अवैध तमंचा व कारतूस बरामद हुए है। अमरोहा देहात थानाक्षेत्र के गांव कमालपुर निवासी स्व. कृतपाल सिंह यूपी पुलिस में कांस्टेबल थे। चार वर्ष पहले आश्रित कोटे पर उनकी बेटी पूजा को नौकरी मिल गई। वर्तमान में उसकी तैनाती बदायूं जनपद में है।
बृहस्पतिवार को महिला कांस्टेबल की मां सुनीता देवी कैलसा स्थित यूपी ग्रामीण बैंक (प्रथमा बैंक) में 45 हजार रुपये जमा करने के लिए गई थी। रुपये एक थैले में थे। उनका खाता बंद होने के कारण बैंक में रुपये जमा नहीं हो सके। लिहाजा सुनीता देवी वापस टेंपो से रामहट पहुंचीं और वापस घर जाने के लिए सवारी का इंतजार करने लगी।
इसी दौरान एक बाइक सवार वहां पहुंचा और सुनीता देवी ने उससे लिफ्ट मांग ली। करीब 200 मीटर चलने के बाद एक अन्य युवक खड़ा मिला। बाइक सवार ने उसे भी बैठा लिया। इसके बाद युवकों ने सुनीता देवी को नदी के पुल के पास उतार दिया और रुपयों से भरा थैला छीनकर भाग निकले।
पुलिस ने इस मामले में अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान डिडौली कोतवाली क्षेत्र के नीलीखेड़ी निवासी कपिल उर्फ विजय सागर और अमरोहा देहात थानाक्षेत्र के पृथ्वीपुर निवासी विवेक के रूप में हुई। सीओ ने बताया कि कपिल उर्फ विजय सागर झोलाछाप है।
वह पृथ्वीपुर गांव में विवेक के घर के सामने दुकान चलाता है। यहीं पर दोनों में दोस्ती हुई। पुलिस के मुताबिक विवेक को उधार लिए पांच हजार रुपये चुकाने थे। इसलिए उसने झोलाछाप कपिल उर्फ विजय सागर से रुपये मांगे। लेकिन कपिल उर्फ विजय सागर ने भी खुद को रुपये की जरूरत होने की बात कही।
इसके बाद दोनों ने मिलकर लूट करने की योजना बनाई और कैलसा स्थित यूपी ग्रामीण बैंक में पहुंच गए थे। तभी उन्होंने महिला कांस्टेबल की मां सुनीता को रुपयों के साथ देखा। रुपये जमा नहीं होने पर जैसे ही सुनीता बैंक से निकलीं तो दोनों आरोपियों ने उनका पीछा शुरू कर दिया। वारदात के समय विवेक बाइक चला रहा था, जबकि बाइक कपिल उर्फ विजय सागर की थी।