माना जाता है कि आदमपुर में करीब 350 साल पुराना प्राचीन मंदिर है। क्षेत्र में इस मंदिर की बड़ी मान्यता है। हर साल फाल्गुन तथा सावन माह में हजारों शिवभक्त हरिद्वार से कांवड़ लाकर यहां जलाभिषेक करते हैं। समय-समय पर मंदिर में मेले का आयोजन होता है। त्रिमूर्ति धाम पातालेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य सेवक पूर्व जिला पंचायत सदस्य सतीश अग्रवाल ने बताया आदमपुर में स्वयंभू प्रकटेश्वर महादेव मंदिर है। पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रीकृष्ण-रुकमणी जी के साथ आदमपुर के इस प्राचीन मंदिर में विश्राम कर चुके हैं। रुकमणी के भाई शिशुपाल की यहां राजधानी थी। मंदिर में विश्राम करने के बाद श्रीकृष्ण-रुकमणी के साथ वंश गोपाल तीर्थ संभल गए थे। मंदिर में भोले के भक्तों को अक्सर तांता लगा रहता है, लेकिन फाल्गुन और श्रावण मास में यहां अधिक भीड़ रहती है। हर सोमवार को भंडारे का आयोजन भी होता है।
मनोकामना पूर्ण होने पर झाड़ू चढ़ाने की है परम्परा
त्रिमूर्ति धाम पातालेश्वर महादेव मंदिर आदमपुर की क्षेत्र के श्रद्धालुओं में काफी मान्यता है। यहां पूजा अर्चना करने से भक्तों की मनोकामना पूर्ण होती है। मनोकामना पूर्ण होने के बाद भक्तों द्वारा यहां पर झाड़ू एवं गुड़ चढ़ाने की परंपरा है। फाल्गुन तथा सावनमें हरिद्वार व ब्रजघाट से शिव भक्त कांवड़ लाकर यहां पर जलाभिषेक करते हैं। इस दौरान मेले का आयोजन भी किया जाता है।
मंदिर परिसर में हर साल होती है रामलीला
त्रिमूर्ति धाम पातालेश्वर महादेव मंदिर आदमपुर के परिसर में सदियों से रामलीला भी होती चली आ रही है। रामलीला का उद्घाटन थानाध्यक्ष द्वारा किए जाने की प्राचीन परंपरा है, जो आदमपुर का थानाध्यक्ष होता है उसके द्वारा रामलीला का शुभारंभ कराया जाता है।
- मंदिर का इतिहास वर्षों पुराना है। मैं भी कई वर्षों से मंदिर की सेवा करता आ रहा हूं। मंदिर की साफ सफाई करने से मन को बहुत शांति मिलती है। सावन माह में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रहती है। महंत रामपुरी महाराज।