बारिश से उफान पर आई गंगा का जलस्तर सोमवार को 10 सेंटीमीटर कम हुआ है। हालांकि, ग्रामीणों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। मंडी धनौरा और हसनपुर तहसील क्षेत्र के 100 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में हैं। फसलें जलमग्न हो गई हैं।
किसानों को फसल नष्ट होने का डर है। वहीं, ग्रामीण पानी के बीच से निकलकर चारा लाने को मजबूर है। बिजनौर से सोमवार को गंगा में 91543 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इससे तिगरी में गंगा का जलस्तर 200.40 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि, यह रविवार के मुकाबले 10 सेंटीमीटर कम है, लेकिन बाढ़ का पानी इतना कम नहीं हुआ कि ग्रामीणों को राहत मिल जाए। धनौरा और हसनपुर तहसील क्षेत्र के 100 से अधिक गांव बाढ़ की जद में हैं। बीते साल बाढ़ में हुए नुकसान को याद कर ग्रामीण भयभीत हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि 10 दिन खेतों में पानी भरा रहा तो उनको भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। एसडीएम मंडी धनौरा चंद्रकांता ने बताया कि बाढ़ के चलते प्रशासन अलर्ट कर दिया गया है।
यह गांव होते हैं बाढ़ से प्रभावित
गजरौला। जिले की की दो तहसील क्षेत्रों से 86 किमी की लंबाई में प्रवाहित हो रही गंगा इस समय उफान पर है। जहां दारानगर, शीशों वाली, जाटों वाली, भुड्डी वाली, मंदिर वाली, जहांगीर वाली, सुल्तानपुर, गंगा नगर, सतैड़ा की मढ़ैयों सहित 20 गांव बाढ़ में चारों तरफ पानी से घिर गए हैं। वहीं शेरपुर, चांदरा, रमपुरा, मुकारमपुर, खाबड़ी, सराय काजी, ढ्यौटी, सुजमना, शरीफपुर शुमाली, मोहरका पट्टी, कांकाठेर, चकनवाला, सिहाली मेव मुस्तकम, ओसीता जगदेवपुर, कबीरपुर सहित करीब 100 से अधिक गांवों की फसल जलमग्न हो गई है।
ग्रामीण नाव, ट्यूब पर निर्भर
गजरौला। रामगंगा पोषक नहर और गंगा के टापू में क्षेत्र के दारानगर, शीशों वाली, भुड्डी वाली, टीकों वाली गांव बसे हैं। जहां पर आने जाने के लिए नाव व ट्यूब के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। दारानगर के ग्रामीणों ने रामगंगा पोषक नहर पार होने को अलीनगर के सामने नाव लगा रखी हैं। जिनसे लोग रामगंगा पोषक नहर को पार होकर अपने गांवों में पहुंचते हैं। वहीं, भुड्डी वाली, टीकों वाली, मंदिर वाली, जहांगीर वाली गांव के लोगों के लिए शीशों वाली गांव के दक्षिण में बह रहा नाला आफत बना हुआ है। इन चार गांवों के ग्रामीणों को गजरौला, धनौरा जाने के लिए पहले शीशों वाली गांव आना पड़ता है।