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Amroha News: हर जगह फहरा रहा था तिरंगा, बहुत यादगार थी 26 जनवरी की पहली सुबह

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अमरोहा। पहली 26 जनवरी 1950 की सुबह बहुत यादगार थी। वह गौरवमयी क्षण, जब संविधान को लागू करने के साथ ही भारत को स्वतंत्र गणराज्य घोषित किया गया। पहला गणतंत्र दिवस जोश भरने वाला था। उस दौर के युवा जश्न मना रहे थे। सुबह होने पर प्रभात फेरियों से गूंजते तराने युवाओं में उत्साह भर रहे थे। आज मनाए जा रहे गणतंत्र दिवस को लेकर उम्र के 90 पड़ाव पार कर चुके बुजुर्ग ने अपनी बात साझा की। बताया कि पहले गणतंत्र दिवस पर शहर से लेकर गांव तक कैसा माहौल था। लोग झांकियों और प्रभातफेरियों में शामिल होकर जश्न मना रहे थे।
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26 जनवरी 1950 का पहला दिन बहुत खास था। मेरी उम्र तब 17 वर्ष रही होगी। तब सड़कों पर युवाओं से लेकर हर वर्ग के लोग झांकियाें में शामिल हुए। युवाओं की टोलियां नारे लगाते हुए टोलियां निकल रही थीं। 15 अगस्त 1947 के बाद यह दूसरा मौका था, जब अलग तरह का उत्साह देखने को मिला। यह पता लगा था कि संविधान लागू हो चुका है। शहर में सुबह से लेकर शाम तक उल्लास नजर आ रहा था। वह दिन अब तक याद है।
- हाली मोहम्मद शबी, अमरोहा
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1950 में मेरी उम्र लगभग 22 वर्ष की रही होगी। अमरोहा शहर का माहौल बहुत अलग था। रेडिया पर प्रधानमंत्री का भाषण सुना। दुकानों पर मिठाई की खरीदारी हो रही थी। शहर को सजाया गया था। सबके चेहरों पर खुशी थी। मैं भी जश्न में शामिल हुआ। शहर में पहला गणतंत्र दिवस धूमधाम से मनाया गया। उल्लास के साथ तिरंगा झंडा भी फहराया गया। उम्र बढ़ने के साथ अब जश्न में तो शामिल नहीं पाता हूं, लेकिन गणतंत्र दिवस को लेकर मन में अलग उत्साह रहता है।
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-फरजंदे शिब्तैन, अमरोहा

26 जनवरी सन 1950 को जब भारत का गणतंत्र लागू किया गया था। उस समय मैं 17 वर्ष का था। रेडियो पर जब भारतीय संविधान लागू होने की घोषणा की गई तो सभी लोग खुशी से उछल पड़े। राष्ट्रीय झंडा लहराते हुए युवकों की टोली भारत माता के जयकारे लगाते हुए गलियों में घूम रही थी। वह दिन आज भी स्मृतियों में जीवंत हो जाता है।
-ध्रुव प्रसाद गोयल, मंडी धनौरा

1950 में जब भारतीय संविधान लागू हुआ और पहला गणतंत्र दिवस मनाया गया। उस समय मेरी उम्र 13 वर्ष रही होगी। पहले गणतंत्र दिवस की सुबह वाली धुंधली तस्वीर अब भी याद है। रेडियो एक पंचायत घर में रखा होता था। उस पर ही गणतंत्र दिवस का भाषण सुना। नगर में अलग ही उत्साह था। जगह-जगह मिठाई बांटी गई।
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-डॉ. निरंजन प्रसाद गर्ग, गजरौला

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