अमरोहा। जिले में सांड़ और नीलगाय के हमले से कई लोगों की मृत्यु हो चुकी है। जबकि कई अपंग हो गए हैं। प्रदेश में ही नहीं अमरोहा के लोगों ने भी मुआवजा की मांग नहीं की। इसका मुख्य कारण लोग इस बारे में जागरूक नहीं हैं। उन्हें नहीं पता नीलगाय या सांड़ के हमले में किसी व्यक्ति की मौत होने पर मुआवजा मिलने का प्रावधान है। इतना ही नहीं घटना होने के बाद प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर जाकर न तो जांच करते हैं और न लोगों को आवेदन करने संबंधित जानकारी देते हैं।
यही वजह है कि सरकारी सुविधाओं के प्रचार-प्रसार और जनता की जागरूकता के अभाव के कारण ये सब हो रहा है। बड़ी बात ये है कि जिले में कई लोगों की मौत और कई लोग अपंग हो गए इसके बाद भी प्रशासन ने एक भी रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी। छुट्टा पशुओं सांड और नीलगाय के हमले से जान गंवाने वाले लोगों के परिजन ने बताया कि उन्होंने सरकार से राहत के लिए कोई आवेदन नहीं किया है। इसकी मुख्य वजह ये है कि उन्हें नहीं पता कि इस तरह की घटनाओं में मुआवजा मिलता है या नहीं। इस संबंध में कभी किसी अधिकारी ने भी नहीं बताया। इतना ही नहीं घटना होने के बाद किसी अधिकारी ने मौके पर आने तक की जहमत नहीं उठाई।
मृत्यु पर चार लाख मुआवजा, घायल होने पर 2.50 लाख तक मदद
अमरोहा। सांड़ या नीलगाय के आघात से मृत्यु होने पर मृतक के आश्रित को 4 लाख रुपये का मुआवजा दिए जाने की व्यवस्था है। चोटिल होने पर शरीर में 40 से 60 प्रतिशत तक अपंगता होने पर 74,000 रुपये और 60 प्रतिशत से अधिक अपंगता होने पर 2.50 लाख रुपये मुआवजा का प्रावधान है। चोटिल व्यक्ति के एक सप्ताह से अधिक समय तक अस्पताल में भर्ती रहने पर 16,000 रुपये और एक सप्ताह से कम समय तक अस्पताल में भर्ती रहने पर 5400 रुपये चिकित्सा सहायता का प्रावधान है।
ये करें हादसे का शिकार लोग
सांड या नीलगाय के हमले से जान गंवाने वालों के परिवार वालों को तहसील में आवेदन करना होगा। आपदा कार्यालय, कलक्ट्रेट में भी आवेदन दिया जा सकता है। आवेदन करने के बाद लेखपाल पूरे मामले की जांच करके रिपोर्ट देंगे। इसके बाद सरकार से मुआवजा दिलाने की कार्रवाई पूरी होगी।
आठ दिन में 125 छुट्टा पशु पकड़े, कितने घूम रहे आवारा, विभाग को नहीं पता
- प्रशासन की ओर से ब्लॉक स्तर पर बनाई गई पांच सदस्य टीम
- विशेष अभियान चलाकर पकड़े जाएंगे छुट्टा पशु
संवाद न्यूज एजेंसी
अमरोहा। शासन के आदेश के बाद भी जिले में छुट्टा पशुओं को पकड़ने के लिए प्रशासन की ओर से कोई खास कवायद नहीं की जा रही है। स्थिति ये है कि पिछले आठ दिन में केवल 125 छुट्टा पशु पकड़े जा सके हैं। इन पशुओं को गोशाला में रखा गया है। वही अब प्रशासन की ओर से ब्लॉक स्तर पर पांच सदस्य टीम गठित की गई है जो विशेष अभियान चलाकर पशुओं को पकड़ेगी।
अमरोहा जिले में छुट्टा पशु फसलों को बर्बाद कर रही है। जबकि खेतों और सड़कों पर हादसे का सबब बन रहे हैं। स्थिति ये है कि छुट्टा पशु हिंसक होते जा रहे हैं। खेतों में काम करने वाले लोगों पर हमला कर रहे हैं। यही वजह है कि पिछले 15 दिन में पांच लोगों पर हमला किया है। जिसमें शुक्रवार को 55 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो गई। बावजूद इसके जिला प्रशासन पशुओं को पकड़ने में दिलचस्पी नहीं ले रहा है। ये स्थिति तब है जब शासन ने पशुओं को पकड़कर गौशाला में छोड़ने के आदेश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने एक अप्रैल तक पशुओं को पकड़ने के आदेश दिए थे। लेकिन मुख्यमंत्री का ये आदेश जिले में परवान नहीं चढ़ पा रहा है। इतना ही नहीं शुक्रवार को जिले के नोडल अधिकारी भी अमरोहा पहुंचकर अधिकारियों को दिशा निर्देश देकर खानापूर्ति कर ली है। सीवीओ डॉ .खुशीराम ने बताया कि एक अप्रैल से अब तक करीब 125 पकड़कर गुरैठा, सांथलपुर, बृह्माबाद, मोहम्मदाबाद गोशाला में छोड़ा गया है। पशुओं को पकड़ने के टीमें लगाई गई हैं। वहीं कितने छुट्टा पशु जिले में हैं इसका आकलन किया जा रहा है।