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लक्ष्य से पिछड़ कर कोरोना से निपटने की चुनौती

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तमाम प्रयासों के बाद भी स्वास्थ्य विभाग टीकाकरण और सैंपलिंग का लक्ष्य हासिल नहीं कर पा रहा है। अधूरे लक्ष्य के चलते कैसे कोरोना से निपटने की चुनौती है। यदि यही हालात रहे तो कोरोना से निपट पाना मुश्किल होगा। पिछले करीब 11 माह से चल रहा कोविड टीकाकरण अभियान जनपद में अभी पूरा नहीं हुआ है। ताजा आंकड़ा चिंताजनक हैं। करीब चार लाख से ज्यादा लोगों की दूसरी डोज अभी बाकी है। इस बीच 1.29 लाख किशोरों को टीका लगाने का लक्ष्य मिला है। सोमवार से 15 से 18 वर्ष तक के किशोरों का टीकाकरण शुरू हो गया है। करीब दो लाख लोग और कतार में खड़े होने से स्वास्थ्य महकमे के चुनौती बढ़ गई है।
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जिले में कोरोना की चेन जुड़ने से तीसरी लहर की आशंका बढ़ गई है। पिछले 20 दिन में अब तक 15 मरीज मिल चुक हैं। शनिवार की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी हरकत में आ गए हैं। अधिकारी और अधीनस्थों के बीच बैठकों को दौर शुरू हुआ। ताकि टीकाकरण अभियान की पुख्ता तैयारियों को अंजाम दिया जा सके। लेकिन जिले में सैंपलिंग और टीकाकरण की स्थित बेहद खराब हैं। हैरत की बात यह है कि शासन ने सैंपलिंग के लिए 2400 का लक्ष्य दे रखा है। इतने लोगों की रोजाना जांच कराई जानी है। लेकिन, सैंपलिंग केवल 600 से लेकर 1100 तक सिमट रही है। यही हालात टीकाकरण के हैं, स्वास्थ्य विभाग रोजाना 34100 का लक्ष्य बनाए हुए हैं, लेकिन टीकाकरण केवल 9 से 14 हजार तक सिमट रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 13,29,368 लोगों के टीकाकरण का लक्ष्य मिला था। इसमें 4.21 लाख लोग कोरोना की दूसरी डोज लगवाने से वंचित हैं। जबकि 15 से 18 वर्ष तक के 1.29 लाख किशोर टीकाकरण के दायरे में हैं। साथ ही 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। जबकि 14 हजार से अधिक कोरोना योद्धाओं और स्वास्थ्य कर्मियों को बूस्टर डोज दी जानी है।
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