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Amroha News: गबन में फंसे तीनों अफसरों के खिलाफ चार्जशीट के लिए कागजातों का इंतजार

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गजरौला(अमरोहा)। बिना बैनामा कराए किसानों को मुआवजा राशि वितरण कर गबन के आरोप में फंसे यूपीसीडा के तीनों सेवानिवृत्त अफसरों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की तैयारी है। इसके लिए पुलिस को यूपीसीडा के अफसरों से वह कागजात चाहिए, जिनसे पता चला कि गबन कैसे हुआ। यूपीसीडा के अफसर पुलिस को कागजात मुहैया नहीं करा रहे हैं।
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यूपीसीडा के निर्माण खंड-4 अलीगढ़ के तत्कालीन अधिशासी अभियंता अजीत सिंह, तत्कालीन क्षेत्रीय प्रबंधक अलीगढ़ तेजवीर सिंह व तत्कालीन अधिशासी अभियंता निर्माण खंड-4 अलीगढ़ के दीपचंद के खिलाफ थाना गजरौला में पिछले साल गबन करने और अमानत में खयानत की एफआईआर दर्ज कराई गई। इसमें वादी बने थे यूपीसीडा के प्रबंधक गोपाल प्रसाद।
सेवानिवृत्त तीनों अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने नाईपुरा खादर व फाजलपुर गौसाईं गांव के किसानों को उनकी अधिग्रहण की गई 151 एकड़ भूमि का 30 करोड़ रुपये मुआवजा वितरण कर दिया, लेकिन उसका बैनामा नहीं कराया। इसमें तीनों की अनियमितता और लापरवाही सामने आई। विभाग ने उनसे गबन की गई धनराशि को वसूल करने की तैयारी कर ली है।
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उधर तीनों पर दर्ज रिपोर्ट को एक साल एक महीना बीत गया, लेकिन अभी तक पुलिस ने उनके खिलाफ न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल नहीं किए। पूर्व में यहां पर तैनात निरीक्षक सतीश कुमार जांच कर रहे थे। उन्होंने काफी समय तक जांच की, लेकिन आरोपपत्र दाखिल नहीं किए। अब एक महीने पूर्व मामले की जांच इंस्पेक्टर क्राइम अमरपाल सिंह को सौंपी गई है।
उनका कहना है कि उन्होंने गबन की रिपोर्ट दर्ज कराने वाले यूपीसीडा के प्रबंधक समेत अन्य अफसरों से वह कागजात मांगे, जिनसे यह पता चल जाए कि गबन कैसे हुआ है। मगर यूपीसीडा के अफसर कागजात मुहैया नहीं करा रहे हैं। विवेचक का कहना है कि उनकी अब तक की गई जांच में यह गबन का मामला ही नहीं बनता। गबन तब होता, वह मुआवजा राशि का वितरण करने की बजाय खुद खर्च कर लेते। अभी वह कागजात मांग रहे हैं। इसके बाद ही आरोपपत्र दाखिल करेंगे।





तीनों पर बनता है अनियमितता बरतने का मामला

गजरौला। यूपीसीडा कानपुर के भूमि अध्यापित अधिकारी उमेश कुमार शुक्ला पूरे प्रदेश में भूमि अधिग्रहण का मामला देखते हैं। उनका कहना है कि सेवानिवृत्त अफसरों ने मुआवजा राशि का वितरण कर दिया था। इसलिए उन पर गबन का मामला नहीं बनता। उन पर अनियमितता बरतने का मामला बनता है। इसके अलावा पुलिस ने अमानत में खयानत की धारा भी लगाई। वह भी नहीं बनती है। क्योंकि मुआवजा राशि सरकारी है न कि किसी व्यक्ति विशेष की। यूपीसीडा के भूमि अध्यापित अधिकारी का कहना है कि यूपीसीडा के अफसर किस कारण पुलिस को गबन के कागजात मुहैया नहीं करा पा रहे, यह समझ से बाहर है। संवाद
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