कभी बाजरे के खेत तो कभी गन्ने को ग्रामीण घेरते देखे गए। वहीं बाजरे के खेत से तेंदुए के शावकों की आवाज सुनकर ग्रामीणों में भगदड़ मचती रही। वन विभाग की टीम न कहीं पिंजरा लगा सकी और न गांव वालों में दहशत कम कर सकी। धनौरा, गजरौला की पुलिस भी मौके पर मुस्तैद रही।
धनौरा रोड से सटे आम के बाग के पास गांव चाकी खेड़ा के जंगल में शनिवार की सुबह करीब नौ बजे भरत सिंह पुत्र शेर सिंह खेत में गेहूं काट रहा था। इसी बीच आम के बाग से एक तेंदुआ गांव के ही हरज्ञान के बाजरे के खेत में घुसता दिखा। उसे देख भरत सिंह की चीख निकल गई। शोर मचने पर आसपास खेतों में मौजूद ग्रामीण मौके पर आ गए। भरत सिंह के भतीजे मनोज पुत्र फत्ते सिंह ने पॉपुलर के पेड़ पर चढ़कर देखा तो खेत में जानवर दिखाई दिया।
इससे पुलिस बुला ली गई। वन विभाग के कुमराला प्रभारी राकेश कुमार भी पहुंच गए। सूचना पर धनौरा सेंच्यूरी के वन रेंजर इकबाल खान भी टीम के साथ पहुंचे। दोपहर तक बाजरे के खेत में तेंदुआ की कोई सुगबुुगाहट न होने पर टीम वापस लौट गई। टीम लौटी ही थी कि तेंदुआ खेत से निकल कर आम के बाग की ओर भागा। ग्रामीणों ने लाठियां लेकर उसका पीछा भी किया लेकिन तेंदुआ छंलाग लगा कर रेलवे ट्रैक पार कर गांव तारापुर के जंगल की ओर चला गया।
इसके बाद फिर वन विभाग की टीम गांव पहुंची। देर शाम तक तेंदुआ की तलाश जारी रही। लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। क्षेत्र में दो तेंदुए और दो शावक बताए जा रहे हैं। इससे ग्रामीणों में दहशत है।