अमरोहा। चैत्र नवरात्र पर माता भगवती के तीसरे स्वरूप मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना की गई। लोगों ने घरों में रहकर माता रानी का गुणगान किया। विधिविधान से पूजा कर परिवार की खुुशहाली की कामना की। भक्तों ने पूजा कर देश की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। शुक्रवार को आज चौथे स्वरूप में माता कूष्मांडा की पूजा की जाएगी।
बृहस्पतिवार को मां भगवती के तीसरे स्वरूप में चंद्रघंटा माता की पूजा अर्चना करने के लिए श्रद्धालुओं की मंदिरों में भीड़ उमड़ पड़ी। नवरात्र के चलते घरों का वातावरण भक्तिमय हो उठा है। शहर के ऐतिहासिक वासुदेव तीर्थ स्थल, प्राचीन दुर्गा मंदिर, चामुंडा मंदिर, बाबा गंगानाथ मंदिर, चौरासी घंटे वाला मंदिर, विरासत वाला मंदिर, कामनाथ मंदिरों पर भक्त पूजा करने पहुंचे। पंडित आशुतोष त्रिवेदी ने बताया कि मां चंद्रघंटा का वाहन सिंह है। इस पर दस भुजाधारी माता चंद्रघंटा प्रसन्न मुद्रा में विराजित होती हैं। देवी के इस रूप में दस हाथ और तीन आंखें हैं। आठ हाथों में शस्त्र हैं तो दो हाथ भक्तों को आशीर्वाद देने की मुद्रा में हैं। इनका रूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इस दिन महिलाओं को घर पर बुलाकर आदर सम्मान पूर्वक उन्हें भोजन कराया जाता है। कलश या मंदिर की घंटी उन्हें भेंट स्वरूप प्रदान करना शुभ होता है। इससे भक्त पर सदा भगवती की कृपा दृष्टि बनी रहती है। उन्हाेंने बताया कि मां दुर्गा अपने चतुर्थ स्वरूप में माता कूष्माण्डा की पूजा की जाएगी। इस दिन आयु, यश, बल व ऐश्वर्य को प्रदान करने वाली भगवती कूष्माण्डा की उपासना-आराधना का विधान है।
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