अमरोहा। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के विरोध में शिक्षकों में उबाल है। सोमवार को शिक्षकों ने सड़क पर उतरकर अपना विरोध जताया। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में प्रदर्शन किया। नारेबाजी कर अपनी आवाज बुलंद की। इसके बाद प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डिप्टी कलक्टर को सौंपा।
शिक्षकों को संबोधित करते हुए महासंघ के जिलाध्यक्ष देवराज सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया टीईटी की अनिवार्यता का निर्णय शिक्षकों के हित में नहीं है। पहले से ही निर्धारित योग्यता के आधार पर शिक्षक नियुक्त किए गए थे जो वर्षों से शिक्षण कार्य कर रहे हैं। अब उनको टीईटी उत्तीर्ण करने की अनिवार्यता करना न केवल अनुचित है बल्कि उनके सेवा अधिकारों व सम्मान के विरुद्ध है।
इसके संबंध में ही चार सूत्री मांगों 27 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त सभी शिक्षकों को टीईटी से मुक्त करने, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध पुनर्विचार याचिका दायर करने, केंद्र सरकार द्वारा इस विषय पर स्पष्ट और शिक्षकों के हित में पक्ष रखने व सेवा में कार्यरत शिक्षकों के अनुभव को ही उनकी योग्यता माने जाने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन डिप्टी कलक्टर को सौंपा गया।
जिला महामंत्री विकास कुमार बंगा ने कहा कि अगर केंद्र सरकार ने इस विषय में शीघ्र निर्णय न लिया तो आंदोलन को राज्यव्यापी स्तर पर विस्तारित किया जाएगा। इस दौरान अन्य संगठनों के पदाधिकारी व शिक्षक भी शामिल रहे जिसमें जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के महामंत्री राजदीप सिंह, अटेवा के जिलाध्यक्ष मतीन अहमद, यूपी बीटीसी शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष जमशेद शरीफ, महिला शिक्षक संघ की नीतू सिंह, मोहित देओल, अमित कुमार तेजा, जोगेंद्र सिंह, नकुल देवल आदि शामिल रहे।
उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने भी सौंपा ज्ञापन
अमरोहा। टीईटी की अनिवार्यता को खत्म करने की मांग को लेकर उत्तर प्रदेश जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ ने भी कलक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल रहे। इस दौरान आयोजित प्रदर्शन में जिलाध्यक्ष नखराज सिंह यादव, लक्ष्मण सिंह आदि ने अपने विचार रखे। संवाद