वन विभाग के अफसर निकले थे कब्जा की गई जमीन का मौका मुआयना करने के लिए, लेकिन बीच में माफिया से ही रास्ता पूछकर लौट आए। कब्जाधारियों ने उन्हें बरगला दिया कि रास्ता तो डूबा हुआ है। आगे पानी भरा है। इसके बाद किसी ने मौके पर जाने की जहमत नहीं उठाई।
पहले से ही रास्ते में खड़े माफिया ने अफसरों को जेबड़ा और शहवाजपुर गुर्जर के जंगल में सैकड़ों बीघे जमीन पर अवैध कब्जे का मौका मुआयना नहीं करने दिया। माफिया ने गुमराह कर वन विभाग के अफसरों को रास्ते से लौटा दिया।
हसनपुर तहसील की ग्राम पंचायत जेबड़ा, शहवाजपुर गुर्जर और जयतोली में गंगा किनारे वन विभाग का 254.44 हेक्टेयर रकबा है। डेढ़ दशक पूर्व वन विभाग ने इस रकबे पर पौधरोपण कराया था। कुछ रकबा गंगा ने काट डाला, जबकि बाकी पर माफिया ने वन विभाग के अफसरों से मिलीभगत के चलते अवैैध कब्जा कर खेती शुरू कर दी। गन्ना, बाजरा, चरई, उर्द की फसलें उगी हैं।
महज 100 बीघे में ही वन है। 20 अगस्त को अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने से वन विभाग के अफसरों में खलबली मच गई। उधर माफिया भी सकते में हैं। शनिवार की दोपहर हसनपुर वन क्षेत्राधिकारी शीतल पंवार अधीनस्थों को साथ लेकर जेबड़ा, शहवाजपुर गुर्जर में वन विभाग की जमीन के मौका मुआयना के लिए निकले। यह जानकारी माफिया को लगी तो वह अफसरों से सेटिंग के लिए पहले से ही तैयार हो गए।
वन क्षेत्राधिकारी चकफेरी वाला महरपुर गांव में गंगा बांध पर पहुंचे थे। यहां मिले माफिया से वन विभाग के अफसरों ने जंगल में जाने का रास्ता पूछा। चूंकि सैकड़ों बीघा जमीन पर इन माफिया का ही कब्जा है, लिहाजा वो मौके पर जाने का सही रास्ता क्यों बताते।
गंगा में भारी बाढ़ बताकर वन विभाग के अफसरों को गुमराह कर दिया। उनको मौका मुआयना करने के लिए वन में नहीं जाने दिया। वन विभाग के अफसर रास्ते से ही वापस भेज दिए।
वन विभाग की जमीन पर अवैध कब्जे का मौका मुआयना करने जा रहा था, मगर रास्ते में बाढ़ का पानी भरा होने के कारण वापस लौटना पड़ा। अब एक दिन बीच में है, 22 तारीख से वन विभाग की टीम सर्वे करेगी। जिससे हकीकत सामने आ जाएगी कि माफिया का कब्जा है या नहीं। -शीतल पंवार, वन क्षेत्राधिकारी हसनपुर।