22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के मौके पर क्यूआर कोड फॉर फ्लोरा (पेड़-पौधे और वनस्पतियों) के तहत स्कूलों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें छात्रों को पेड़-पौधों और वनस्पतियों के लिए क्यूआर कोड बनाने और उनके बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसका उद्देश्य बच्चों में डिजिटल दक्षता विकसित करना है। राज्य परियोजना कार्यालय की ओर से इस संबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए हैं।
स्कूलों में बच्चों को शैक्षिक ज्ञान के साथ अपने पर्यावरणीय परिवेश को सुधारने और बचाए रखने के लिए जागरूक किया जाएगा। 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस के मौके पर होने वाले कार्यक्रम पृथ्वी के संरक्षण और जीव व वनस्पतियों के जागरूकता दिवस के रूप में मनाए जाएंगे, जिसके तहत विद्यालयों के बच्चे अपने आसपास, विद्यालय परिसर या नजदीकी पार्क में जाकर पेड़, पौधों और वनस्पतियों का क्यूआर कोड बनाएंगे। हर पेड़-पौधे का अलग-अलग क्यूआर कोड होगा। जिसमें उस पेड़ के संबंध में जानकारी दी जाएगी। ईको क्लब फॉर मिशन के माध्यम से आयोजित होने इस कार्यक्रम के तहत सभी क्यूआर कोड की जानकारी पोर्टल पर अपलोड भी करना होगी।
ऐसे बनेगा क्यूआर कोड
इको क्लब के नोडल शिक्षक द्वारा विद्यालयों में विद्यार्थियों का समूह बनाया जाएगा। इसके बाद विद्यालय परिसर अथवा आसपास की जगहों में पेड़-पौधों को सूचीबद्ध करना होगा। हर पेड़-पौधे का डाटाबेस तैयार कर उसकी विश्वसनीय जानकारी लिखनी होगी। जिसकी एक वर्ड फाइल अथवा टैक्स्ट फाइल गूगल ड्राइव पर अपलोड करनी होगी। फिर क्यूआर कोड बनाने के लिए www.qr.io या www.qrcode-monkey.com आदि पर जाकर निशुल्क क्यूआर कोड जनरेट पर जाकर टैक्स्ट फाइल में पूरा विवरण टाइप करना होगा।
क्यूआर कोड को प्रिंट कराकर लेमिनेट करना होगा और क्यूआर कोड को उस संबंधित पेड़ पर लगाना होगा। जिससे कोई भी व्यक्ति उसे स्कैन कर पेड़ों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेगा। जिसके बाद सभी प्रधानाचार्यों को इसकी डिटेल इको क्लब के पोर्टल पर अपलोड करना होगी। डीआईओएस विष्णु प्रताप सिंह ने बताया कि सभी माध्यमिक स्कूलों में इसका आयोजन किया जाएगा। जिसके लिए सभी को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।