जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की क्षमता 300 यूनिट ब्लड रखने की है। औसतन प्रतिदिन 15-20 यूनिट ब्लड की यहां खपत होती है। लोगों की सहूलियत को देखते हुए सरकार ने ब्लड बैंक के पीछे ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट स्थापित करने का फैसला लिया था। शासन से मंजूरी मिलने के बाद पहले बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी पूरा हुआ। सभी मशीनें लग चुकी हैं। उम्मीद थी कि इस साल से खून की एक यूनिट से प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी (पैक्ड रेड ब्लड सेल) और क्रॉयोप्रेसीपिटेट तैयार किए जा सकेंगे। यूनिट में लगी मशीनें धूल फांक रही हैं। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि यूनिट पूरी तरह तैयार है। लाइसेंस की प्रक्रिया भी पूरी हो गई है। राज्य से लाइसेंस मिल गया है, दिल्ली से लाइसेंस मिलना बाकी है। लाइसेंस मिलते ही यूनिट को चालू कर दिया जाएगा। जिसके बाद यहीं पर मरीजों को प्लेटलेट्स, प्लाज्मा, पीआरबीसी और क्रॉयोप्रेसीपिटेट मिल सकेंगे।