ई-स्टांप के चलन में आने के बाद फिजिकल स्टांप की डिमांड कम हो गई थी। मार्च माह में सरकार की कैबिनेट की बैठक में 10 से लेकर 25 हजार रुपये तक के फिजिकल स्टांप को चलन से बाहर करते हुए नष्ट कराए जाने का निर्णय लिया गया था। जिले के कोषागार में लगभग 54 करोड़ रुपये के स्टांप रखे हुए थे। एक निर्धारित समय तक इन स्टांप को कोषागार में वापस किए जाने का विकल्प भी दिया गया था।
जिसके बाद कोषागार में रखे इन स्टांप को नष्ट करने के निर्देश शासन की और से दिए गए थे। जिसमें डीएम ने एडीएम वित्त व राजस्व ब्रजेश कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया था। जिसमें डीएम द्वारा नामित डिप्टी कलक्टर ब्रजपाल सिंह, एआईजी स्टांप अनून सिन्हा, सीओ पंकज त्यागी, सीएफओ अनिल कुमार व एसटीओ कुंदन झा को शामिल किया गया था। समिति के सभी सदस्यों के सामने कलक्ट्रेट में गड्ढा खोदवा कर सभी स्टांप को आग लगाते हुए नष्ट करा दिया गया। इस दौरान समिति के सभी सदस्य मौजूद रहे।