अमरोहा। जिन पर गांवों के विकास का जिम्मा है, वह अपना विकास करने में लग हुए हैं। यह हम नहीं कह रहे बल्कि उन ग्रामीणों का कहना है, जिन्होंने प्रधानों के खिलाफ अधिकारियों तक शिकायतें की हैं। जिले के तेरह ग्राम प्रधानों के दामन पर अनियमितता करने का दाग लगा है। शिकायत के बाद प्रधानों के खिलाफ जांच प्रक्रिया चल रही है। डीएम ने सभी के खिलाफ जांच टीम का गठन किया हुआ है।
जिले के विकास की सीढ़ी गांवाें से होकर गुजरती है, तो गांवों के विकास का जिम्मा ग्राम प्रधान का होता है। ग्राम प्रधान ही गांव को विकास के पथ पर लेकर जाता है। गांव में पक्के रास्ते हों अथवा पानी निकासी के लिए नाले, पेयजल और शौचालय की सुविधाओं के साथ साथ ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में भी ग्राम प्रधान की बड़ी भूमिका होती है। लेकिन इन विकास कार्यों में अनियमितता एवं गड़बड़ी भी बड़े स्तर पर होती है। जिसको लेकर गांवों में खींचतान बनी रहती है। फिलहाल जिले में तेरह ग्राम प्रधानों के विरुद्ध ग्रामीणों ने शिकायत की हुई है। जिसमें जांच टीम का गठन कर शिकायतों की सत्यता को परखा जा रहा है। ग्रामीणों द्वारा सड़क निर्माण, शौचालय, प्रकाश व्यवस्था समेत कई मामलों में वित्तीय अनियमितता की। विकास कार्य मानक के अनुरूप नही कराए गए। ग्रामीणों द्वारा इन प्रधानों की शिकायत डीएम को शपथ पत्रों पर की गई थी। जिसके बाद डीएम ने इन सभी ग्राम प्रधानों के विरुद्ध जांच कमेटी का गठन करते हुए शीघ्र जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा गया है।
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इन पंचायतों के प्रधान है जांच के दायरे में
गंगेश्वरी ब्लॉक के गांव पौरारा, रहरई और बांस का मदारीपुर, धनाैरा ब्लाॅक के गांव कुआखेड़ा, शाहजहांपुर, नवाबपुर भूड़, डींगरा तथा चुचैला कलां, अमरोहा के खेड़ा एवं बीलना, गजरौला के रहदरा एवं कसेरूवा तथा जोया ब्लॉक के गांव पृथ्वीपुर कला के ग्राम प्रधान जांच के दायरे में हैं।
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पृथ्वीपुर कलां में नौ अक्तूबर को पहुंचेगी जांच टीम
पृथ्वीपुर कलां निवासी छत्रपाल सिंह ने डीएम को शपथ पत्र पर शिकायती पत्र देते हुए ग्राम प्रधान पर विकास कार्यों में अनियमितता का आरोप लगाया था। जिसके बाद डीएम ने डिप्टी कलेक्टर अनिल कुमार एवं बीडीओ लक्ष्मण प्रसाद तथा लोक निर्माण के सहायक अभियंता को जांच अधिकारी नामित किया था। डीपीआरओ पारूल सिसोदिया ने बताया कि नौ अक्तूबर को जांच टीम गांव पहुंचकर शिकायतों की जांच करेगी।
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ग्रामीणों द्वारा जिले की तेरह पंचायतों में विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायतें की गईं थीं। जिसके बाद जांच टीमों का गठन हुआ था। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। -पारुल सिसोदिया, डीपीआरओ, अमरोहा
वर्ष 2015-16 में भी हुआ था गड़बड़झाला
साल 2015-16 में जोया ब्लाक क्षेत्र की पंचायत जगुआ खुर्द में विकास के नाम पर 167366 रुपये, रजबपुर में 697055 रुपये, हाकमपुर में 20675 रुपये, रायपुर शहजादपुर में 228440 रुपये, मोहम्मदुर में 265652 रुपये, शहबाजपुर कलां में 182603 रुपये खर्च किए गये थे। इन सभी पंचायतों में की जिम्मेदारी तत्कालीन सचिव नानक चंद पर थी। विकास कार्यों के नाम पर धनराशि तो खर्च कर दी, लेकिन वह खर्च से संबंधित ब्यौरा विभाग को उपलब्ध नहीं करा सके। नारंगपुर में भी ऐसा ही मामला सामने आया। वहां 2,68,941 रुपये खर्च किए गए लेकिन सचिव अशोक कुमार द्वारा खर्च का कोई बिल उपलब्ध नहीं कराया। पंचायती राज विभाग ने कई बार नोटिस भी भेजे लेकिन इसके बाद भी न तो बिल उपलब्ध कराए गए और न ही धनराशि जमा कराई गई। दोनों सेवानिवृत्त हुए तो उनके विरुद्ध आरसी जारी हुई।