अमरोहा। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की स्थापना में और देरी हो सकती हैं। क्योंकि अभी डीपीआर तैयार नहीं हो सकी है, जबकि शासन ने साढ़े चार करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट के लिए तकनीकी रूप से दक्ष अधिकारी और कर्मचारी की मांग की गई है। क्योंकि जेई सिविल के अलावा किसी अन्य की तैनाती नहीं है।
शहर का ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एक चुनौती बन गई है। इसके तहत ठोस कचरे का निपटान होना जरूरी है। ताकि लोगों को संभावित संक्रामक बीमारियों से बचाया जा सके। स्वच्छ भारत मिशन के तहत शहर के लिए सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट की स्थापना की जानी है। शासन ने इसके लिए साढ़े चार करोड़ रुपये आवंटित कर दिए हैं, लेकिन नगर पालिका में अब तक डीपीआर तैयार नहीं हो सका है। ईओ डॉ. मणिभूषण तिवारी ने शासन को पत्र लिख कर अवगत कराया है। उन्होंने कहा है कि केवल जेई सिविल की तैनाती है। डीपीआर के लिए तकनीकी तौर पर दक्ष अधिकारी और कर्मचारी की जरूरत है। वहीं डिटेल प्रोजेेक्ट रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं। दरअसल सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में ठोस समेत अन्य सभी तरह के अपशिष्ट पदार्थों का निस्तारण होना है। शहर में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन शुरू है। इससे विभिन्न मोहल्लों में वाहन से कूड़े को उठाना होता है। इसके बाद चिह्नित स्थल पर गिराया जाता है। हालांकि कई बार लोगों ने कूड़े को लेकर एतराज जताया है, लेकिन नगर पालिका के पास कोई और विकल्प नहीं है। ऐसे में डीपीआर तैयार कराने में और देरी हो सकती है। इसके चलते कचरे का निस्तारण के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।