उद्योग व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि ई-कॉमर्स ने कुछ ऐसी प्रथाओं को जन्म दिया है, जो निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को खतरे में डालती हैं। विशेष रूप से व्यापारी, एमएसएमई, खुदरा विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को प्रभावित करती हैं। बताया कि विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को तभी पूरा किया जा सकता है जब स्थानीय उत्पाद, स्थानीय व्यापार एवं स्थानीय पयर्टन को बढ़ावा दिया जाए।
उन्होंने कहा कि ई-काॅमर्स कंपनियां कानूनों का उल्लंघन करते हुए उसमें बाधक बन रही हैं। बताया कि ई-कॉमर्स प्लेटफार्म पर विक्रेताओं का अनिवार्य केवाईसी किया जाना चाहिए। बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों ने लगातार भारी वित्तीय घाटे की सूचना दी है। उच्च बिक्री मात्रा के बावजूद यह नुकसान इस बात का प्रमाण है कि पारंपरिक खुदरा विक्रेताओं सहित प्रतिस्पर्धियों को स्पर्धा से बाहर करने के लिए उत्पादों को अस्थिर दरों पर बेचा जाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कंपनियों को नियंत्रित कर छोटे और मझोले व्यापारियों को सुरक्षा प्रदान की जाए। इस अवसर पर तमाम व्यापारी माैजूद रहे।