अमरोहा। नगर पालिका के जिम्मेदारों की मनमानी का खामियाजा शहर के आम नागरिकों को उठाना पड़ रहा है। नाला सफाई के दौरान निकलने वाली सिल्ट मुसीबत बनी हुई है। नगर पालिका के अधिकारी-कर्मचारियों की लापरवाही के कारण बुधवार को भी शहर दो घंटे जाम से जूझा। छोटे-छोटे स्कूली बच्चे और आम लोग परेशान दिखे। सिल्ट को सड़क पर डालना परेशानी का सबब बना हुआ है। बावजूद इसके जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं।
नगरपालिका कर्मचारियों की लापरवाही लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। नालों से सिल्ट निकाल कर सड़क पर डालने के कारण लोग परेशान हैं। नगरपालिका कर्मचारियों की मनमानी इतनी हावी हो गई है कि उन्हें लोगों की परेशानी नहीं दिखती। रात को नाले से निकली सिल्ट को उठाने के लिए दिन निकलने के बाद ट्रैक्टर ट्राली और जेसीबी सड़क पर खड़ी कर देते हैं। जिस कारण दो दिन से लगातार टीपी नगर चौराहे से नत्थेखां की मस्जिद तक जाम लग रहा है। सुबह में 8 बजे तक शहर में नो एंट्री पर छूट रहती है। जिस कारण ट्रक, डीसीएम व अन्य छोटे-बड़े वाहन भी जाम में फंस जाते हैं। मंगलवार को ढाई घंटे शहर जाम से जूझा तो बुधवार की सुबह दो घंटे जाम की स्थिति बनी रही। बुधवार की सुबह भी नगर पालिका के कर्मचारी सिल्ट उठाने में लगे रहे। इसके चलते भीषण जाम लग गया। जाम में फंसे स्कूली बच्चे परेशान दिखे। जाम में फंसे होने के कारण स्कूली बच्चे देर से विद्यालय पहुंचे। जो लोग ड्यूटी जा रहे थे वह भी जाम में फंसे रहे। इस दौरान दो मिनट की दूरी काटने में करीब आधा घंटा का समय लगा। शहर में करीब दो घंटे वाहन रेंग रेंग कर गुजरे। नगर पालिका की ओर से जाम से निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नगर पालिका कर्मचारी सिल्ट हो पांच बजे से पहले उठाएं तो शहर में जाम नहीं लगेगा। लेकिन वह छह बजे के बाद सिल्ट को उठाने के लिए सड़क पर जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्राली खड़ी कर देते हैं। जिस कारण बिजनौर और जोया की दिशा से आने वाले वाहनों की लंबी लाइन लग जाती है।
ईओ बृजेश सिंह ने बताया कि कचरे और सिल्ट सूखी धूल से लोग परेेशान शहर की साफ-सफाई जरूरी है। लेकिन नगर पालिका के जिम्मेदारों की लापरवाही के कारण सड़क पर पड़े कूड़े की दुर्गध, नालों से निकली सिल्ट की सूखी धूल ये सांसों के जरिए फेफड़े को छलनी कर रही है। गंदगी और धूल से आसपास रहने वाले दुकानदार तो परेशान हैं ही, आने-जाने वाले राहगीर भी मुंह में रूमाल लगाकर निकलने को मजबूर हैं।