अमरोहा। शहर में उर्दू जुबान और साहित्यिक का एक विशेष नाम, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यों में विशेष योगदान देने वाले शौक अमरोहवी की पुण्यतिथि पर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई।
मंगलवार रात नवाब मंजिल स्थित कारवाने खुलूस के कार्यालय पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। नवाब सैयद मुराद अली खान ने कहा कि शौक अमरोहवी इस अदबी शहर अमरोहा की तहजीब का एक नमूना थे। उनका इस क्लब से गहरा संबंध था। उनके व्यक्तित्व के कई पहलू थे। वह उर्दू भाषा के लिए संघर्षशील रहे। वह संस्कृति और साहित्य के संरक्षक और शांति व एकता के रक्षक थे। देहांत के बाद से क्लब उनकी कमी को बहुत अधिक महसूस करता है।
शौक अमरोहवी के बेटे आलमगीर इब्ने शौक ने कहा कि उन्हें हमेशा अपने पिता और इस क्लब के साथ जुड़ाव महसूस होता है। उन्होंने हमेशा इस संस्थान के कार्यों में विशेष रूप से हिस्सा लिया है। अध्यक्ष महबूब हुसैन जैदी ने कहा कि शौक अमरोहवी उर्दू जगत का एक बड़ा नाम थे। उनके व्यक्तित्व में आकर्षण था। सबसे खुश होकर मिलना उनकी पहचान थी। देश के विभिन्न हिस्सों में होने वाली गोष्ठियों में शहर के साथ-साथ प्रांत का भी प्रतिनिधित्व करते थे।
उन्होंने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, चौधरी चरण सिंह, इंद्र कुमार गुजराल, वीपी सिंह और राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा, ज्ञानी जैल सिंह, शायर जॉन एलिया, कमाल अमरोहवी, रईस अमरोहवी के साथ विभिन्न राष्ट्रीय अंतराष्ट्रीय गोष्ठियों में मंच साझा किया था। इस दौरान प्रोफेसर नाशिर नकवी, सैयद रजा तहसीन तकवी, एम इस्लाम आलमी एडवोकेट, इस्तेजाब हुसैन जैदी, पंडित भुवन शर्मा, अरमान हुसैन आदि मौजूद रहे।