अमरोहा। गुनाहों से माफी की रात शब-ए-बरात नौ अप्रैल को है। इस रात की अहमियत बहुत अधिक है। इस्लाम में माना जाता है कि इस रात को पूरे एक साल के गुनाहों का हिसाब किताब होता है। इस रात की इबादत और दुआ कबूल होती है। अल्लाह तआला इस रात को पहले अर्श पर आ जाता हैं। परवरदिगार अपने बंदों पर खास तौर पर मेहरबान रहता हैं। लेकिन लॉकडाउन को देखते हुए घर में खुदा की इबादत करें। उलमा ने घर में ही कुरआन की तिलावत, नफिल नमाज के अलावा वजीफा पढ़ने को हिदायत दी है। अल्लाह से रो रोकर गुनाहों की माफी तलाफी कराने को ताकीद दी है।
इस्लामिक महीना शाबान की 15वीं रात को शब-ए-बरात है। इस बार लॉकडाउन के दौरान शब-ए-बरात मनाई जाएगी। ऐसे में उलमा ने लोगों से लॉकडाउन पर अमल करने की हिदायत दी है। दरअसल कोविड-19 के संक्रमण से बचने के लिए एक दूसरे से दूरी जरूरी है। कोरोना से बचाव को लेकर उलमा भी बेहद सजग है। फिलहाल मस्जिदों के दरवाजे आम लोगों के लिए बंद हैं। चुनिंदा लोग ही नमाज के लिए आ जा रहे हैं। शब-ए-बरात को लेकर मुस्लिम घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस खास दिन को लेकर बच्चे और युवा उत्साहित हैं। दरअसल इस रात को मस्जिदों में इबादत का सिलसिला पूरी रात जारी रहता है। इसके चलते शहर की सड़कें और गलियां गुलजार रहती हैं।
उलमा की अपील, घरों में करें इबादत, कब्रिस्तान नहीं जाएं
अमरोहा। मुफ्ती अफ्फान मंसूरपुरी ने कहा कि शब-ए-बरात बहुत अफजल वाली रात है। इस रात को घरों में इबादत करें। कब्रिस्तान नहीं जाएं। ऐसा करना बेहद जरूरी है। लॉक डाउन का पालन करें, ताकि एक दूसरे की जान जोखिम में न आ सके। उन्होंने कहा कि इंतकाल कर चुके लोगों की मगफिरत के लिए घर से दुआ करें। मुफ्ती तौहीद रजा ने कहा कि इबादत की रात है शब-ए-बरात। इस रात में संजीदगी से इबादत करें। कुरआन की तिलावत अधिक से अधिक करें।
घरों में ही अदा करें फातिहा
नौगांवा सादात। शिया धर्मगुरु मौलाना हसन इमाम आब्दी ने शबेबरात घरों में मनाने की अपील की है। इसके साथ ही दूरी पर रह कर इबादत करने को कहा है। उन्होंने कहा कि इस दिन इमाम मेहंदी का जन्म दिवस भी है। शिया समुदाय के लोग खुशी के साथ मनाते हैं, जिसमें पारंपरिक खाने और व्यंजन बनाए जाते हैं। कुरान के तिलावत का एहतमाम करें। शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना हसन इमाम आब्दी ने कहा कि इस बार कब्रिस्तान में नहीं जाएं। फातिहा अपने घरों में अदा करें। लोगों से मिलने जुलने में परहेज करें। घरों में रहने से बीमारी से हिफाजत की जा सकती है।