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जानलेवा हमले के दोषी को सात, एससीएसटी एक्ट में दो दोषियों को तीन साल का कारावास

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ग्यारह साल पहले जानलेवा हमला करने के दोषी को न्यायालय ने सात साल की सजा सुनाई है। जबकि इसी मुकदमे के दो अन्य आरोपियों को एससीएसटी एक्ट में तीन साल की सजा सुनाई गई है। तीनों दोषी जमानत पर बाहर थे। न्यायालय का फैसला आने के बाद जानलेवा हमला करने वाले दोषी को कस्टडी में लेकर जेल भेज दिया गया है।
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हसनपुर कोतवाली क्षेत्र के गांव जयतौली में नन्हे सिंह का परिवार रहता है। 30 अक्तूबर 2011 की सुबह नन्हे सिंह अपने बेटे विनोद कुमार और रोहताश के साथ खेत पर फसल की सिंचाई करने गए थे। दोपहर करीब ढाई बजे गांव के ही रहने वाले शकील, कमर, असरार और आसिफ गन्ने के खेत से निकले और गाली-गलौज करने लगे थे। दोनों परिवारों के बीच पुरानी रंजिश चल रही थी। विरोध करने पर आरोपियों ने जान से मारने की नियत से रोहताश को गोली मार दी। घटना में रोहताश घायल हो गए। इस दौरान आरोपियों को पकड़ने की कोशिश की गई तो चारों जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकले थे। इस मामले में पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। पुलिस ने विवेचना के दौरान असरार को निर्दोष पाया था। बाद में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सभी आरोपी जमानत पर बाहर थे। ये मुकदमा विशेष सत्र न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) तृप्ता चौधरी की अदालत में विचाराधीन था।
बृहस्पतिवार को न्यायालय ने मुकदमे में सुनवाई की। अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मनोज सक्सेना ने पैरवी की। न्यायालय ने साक्ष्यों और सबूतों के आधार पर शकील को जानलेवा हमला करने का दोषी पाया और 7 साल की सजा सुनाई। साथ ही 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया। जबकि कमर व आसिफ को एससी एसटी एक्ट में दोषी पाते हुए तीन-तीन साल की सजा और 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
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