कोरोना के खौफ में कुछ सकारात्मक चीजें भी छुपी हैं। हमेशा यह बात होती थी कि अच्छी और एक्सपोर्ट क्वालिटी का आम तो विदेश में चला जाता है। लेकिन इस बार आप भी अमरोहा से विदेशों में एक्सपोर्ट होने वाले लजीज आमों का स्वाद चख सकते हैं।
इसकी वजह यह है कि इस बार मैंगो के एक्सपोर्ट हब माने जाने वाले अमरोहा को यूरोप, आस्ट्रेलिया और कुछ एशियाई देशों से आर्डर नहीं मिले । जबकि कुल एक्सपोर्ट में तीस से चालीस फीसदी आम यूरोप के देशों में ही जाता है। ऐसे में एक्सपोर्ट न होने की स्थिति में अमरोहा और आसपास के जिलों में इन आमों की सप्लाई हो सकती है। हालांकि खाड़ी देशों से मांग बरकरार है।
अमरोहा का लंगड़ा और चौसा दुनिया की बड़ी मंडियों में अपनी धमक जमा चुका है। यहां के आम दुबई, सऊदी अरब, यूएई, जापान, सिंगापुर, कतर, ओमान, कजाकिस्तान, उजबेकिस्तान सहित यूरोप के कुछ देशों में भेजे जाते हैं। इस बार कोरोना वायरस के चलते यूरोप के देशों से आर्डर नहीं मिला है। ऐसे में तय है कि करीब तीस फीसदी आम एक्सपोर्ट नहीं होंगे। ऐसे हालात में यहां लोगों को भी एक्सपोर्ट वाले आम खाने को मिल सकते हैं।
यूपी से ढाई सौ टन आम विदेश जाता है
मैंगो एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष नदीम सिद्दीकी ने बताया कि यूपी से करीब हर साल ढाई सौ टन आम की सप्लाई दूसरे देशों की जाती है। इसमें साठ सत्तर फीसदी हिस्सेदारी अमरोहा की होती है। बाकी लखनऊ और सहारनपुर से होती है। इस बार यूरोप के देशों से तो आर्डर नहीं मिले लेकिन खाड़ी देशों से भरपूर आर्डर आ रहे हैं।
इन देशों से आ चुके हैं आर्डर
ओमान, कतर, बहरीन, जद्दा, सऊदी अरब, कजाकिस्तान और उजबेकिस्तान
इन देशों से नहीं आए आर्डर
जापान, सिंगापुर, न्यूजीलैंड, आस्ट्रेलिया, इटली
यूपी का सीजन मई से होगा
अभी महाराष्ट्र और गुजरात के आम का सीजन है। वहां के आम का निर्यात भी कोरोना के असर से प्रभावित है। महाराष्ट्र के अलफांसो, गुजरात के केसर और आंध्र प्रदेश के वैगनपल्ली आम की सप्लाई विदेश में होती है। यूपी में आम के सीजन की शुरुआत मई होगी, तब तक कोरोना से कुछ राहत मिल सकती है।