तालाब की जमीन पर रखे बिटारों को हटाने के फरमान से गांव बुढ़ेरना के दलित भड़क उठे और हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर मौके पर पहुंची एसडीएम सदर प्रवीणा की गाड़ी को घेर लिया और तीन घंटे तक गांव से नहीं जाने दिया। बोले, उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
श्मशान घाट, कब्रिस्तान, स्कूल, तालाब और चकरोड की जमीन पर अवैध कब्जा कर फसलें उगाई जा रही हैं और राजस्व टीम रसूखदारों के दबाव में काम कर रही है। इस पर एसडीएम ने अपने सामने समस्त जमीन की पैमाइश कराई और तत्काल कब्जा हटाने के आदेश दिए।
अमरोहा विकास खंड के गांव बुढ़ेरना में मंगलवार को राजस्व विभाग की टीम तालाब की पैमाइश करने पहुंची थी। तालाब की नाप जोख के बाद टीम ने दलितों से तालाब किनारे रखे बिटोरों को हटाने के लिए कहा। इस दौरान दलित भड़क उठे और मौके पर जमा हो गए। इस दरम्यान राजस्व टीम पर भेदभाव का आरोप लगाया।
बोले- तालाब की एक बीघा जमीन पर जो खेती की जा रही है। इसे क्यों नहीं हटाया जा रहा। यह सुनकर टीम बगले झांकने लगी। इस पर दलितों ने हंगामा करना शुरू कर दिया और एसडीएम को मौके पर बुलाने की मांग की। सूचना पर करीब साढ़े 11 बजे एसडीएम सदर प्रवीणा मौके पर पहुंची तो ग्रामीणों ने उनकी गाड़ी को घेर लिया।
कानूनगो और लेखपाल पर रसूखदारों से हमसाज होने का आरोप लगाया और एसडीएम को बताया कि गांव के दूसरी जाति के रसूखदारों ने तालाब की एक बीघा, स्कूल की साढ़े तीन बीघा, श्मशानघाट और कब्रिस्तान की तीन-तीन बीघा जमीन पर अवैध कब्जे कर लिया है।
वे इस पर खेतीबाड़ी कर रहे हैं जबकि राजस्व अभिलेखों में बीस मीटर चौड़ाई में दर्ज दो किलोमीटर चकरोड पर अवैध कब्जा करके फसल उगाई जा रही है। शिकायत पर एसडीएम ने मौके पर पहुंचकर सभी जमीनों को देखा और तत्काल समस्त जमीनों की पैमाइश कराकर कब्जामुक्त करने के आदेश दिए। चकरोड की नाप जोख हुई, तो पता चला कि मौके पर छह मीटर चौड़ी रह गई है। इस कार्रवाई में तीन घंटे का समय लगा और तब तक दलितों ने एसडीएम को गांव से हिलने तक नहीं दिया।