अमरोहा। जनपद के स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की जान जोखिम में है। बावजूद इसके जिम्मेदार चुप्पी साधकर बैठे हैं। स्थिति यह है कि 150 से अधिक अनफिट और पंजीयन निलंबित वाहनों से स्कूली बच्चों को ढोया जा रहा है। ये सब परिवहन विभाग के जिम्मेदारों की सांठगांठ से चल रहा है।
कुछ दिन पहले एआरटीओ ने अनफिट वाहन मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की बात कही थी, जिन स्कूलों में अनफिट वाहन लगे हुए हैं, उनकी मान्यता रद्द कराने का दावा किया था। लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। शायद परिवहन विभाग की जिम्मेदार और स्कूल संचालकों को किसी बड़ी घटना का इंतजार है।निजी स्कूल संचालकों ने छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था तो कर ली, लेकिन बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे ही रहती है। जिले के कुछ स्कूलों को छोड़कर बाकी स्कूलों के वाहनों की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। परिवहन विभाग के रिकॉर्ड में करीब 610 स्कूल वाहन पंजीकृत हैं। इसमें बस, वैन व अन्य वाहन शामिल हैं। हैरत की बात ये है कि करीब 230 स्कूली वाहन ऐसे हैं, जिनकी फिटनेस नहीं हो सकी है। जबकि वह सड़कों पर यह फर्राटा भर रहे हैं। इन वाहनों में कैमरे नहीं लगे हैं, जबकि फर्स्ट एड बॉक्स भी नहीं है। स्कूलों की बदइंतजामी और परिवहन विभाग की लापरवाही बच्चों के लिए खतरा बनी हुई है। इतना ही नहीं शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों में सैकड़ों वाहन ऐसे हैं, जो रजिस्टर्ड नहीं हैं और वह बिना पंजीकरण के ही दौड़ रही हैं। परिवहन विभाग की ओर से इन 230 वाहनों की पंजीयन निलंबित कर दिया गया है। जबकि 70 प्रतिशत वाहनों के चालान कर दिए गए। बावजूद इसके वाहन मालिक गंभीर नहीं हैं।
पच्चीस दिन पहले एआरटी ने अनफिट वाहनों के मालिकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही थी। जिन स्कूलों में ये अनफिट वाहन लगे हुए हैं, उनकी मान्यता रद्द करने के लिए संस्तुति करते हुए डीआईओएस और डीएम को पत्र लिखने का दावा किया था। लेकिन जिम्मेदारों के ये दावे हवा-हवाई हैं।
वाहन मालिकों और स्कूल संचालकाें को एक बार फिर नोटिस दिए हैं। जल्द की एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।-महेश चंद शर्मा, एआरटीओ अमरोहा