पार्टी लाइन से आउट होने पर दरकिनार हुए दानिश
- बतौर संसदीय दल नेता दानिश ने शिक्षा से हाईकोर्ट बेंच तक उठाया मुद्दा
- पहले सत्र के आखिरी दिन बसपा संसदीय दल के नेता पद से हटाए गए
- पहले मुख्य सचेतक, दूसरी बार के फेरबदल में संसदीय दल के नेता बनाए गए
अमर उजाला ब्यूरो
अमरोहा। सदन में शिक्षा से लेकर हाईकोर्ट बेंच तक का मुद्दा उठाने वाले सांसद कुंवर दानिश अली लोकसभा सत्र के आखिरी दिन बसपा संसदीय दल के नेता के पद से हटा दिए गए। हालांकि इससे पहले उन्हें मुख्य सचेतक बनाया गया था, लेकिन कुछ दिन के बाद ही फेरबदल कर संसदीय दल के नेता की जिम्मेदारी सौंप दी। दानिश के संसदीय दल के नेता से हटाए जाने को लेकर सियासी गलियारों में खूब चर्चाएं हैं। चर्चा यहां तक है कि तीन तलाक बिल पर पार्टी लाइन से हटना दानिश अली को महंगा पड़ा।
बसपा मुखिया मायावती ने बुधवार को पार्टी के कई महत्वपूर्ण पदों पर फेरबदल किया। इसमें सांसद कुंवर दानिश अली से लोकसभा संसदीय दल के नेता की जिम्मेदारी से हटाया गया। खास बात यह है 17वीं लोकसभा के पहले मानसूनी सत्र के आखिरी दिन बसपा का फैसला कई मामलों में अहम है। मुखर तरीके से बात रखने वाले दानिश अली को पद से हटाने के पीछे खास मकसद भी बताया जा रहा है। सूत्रों की माने तो तीन तलाक के मुद्दे पर दानिश अली की पार्टी लाइन से अलग राय थी। वह पार्टी की ओर से तीन तलाक बिल के खिलाफ वोटिंग चाहते थे। जिसे लेकर हाईकमान और दानिश अली में मतभेद था। वहीं अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर भी बोलने से इंकार करने की बात बताई जा रही है। माना जा रहा है कि इन मुद्दों को लेकर ही उन्हें संसदीय दल के नेता पद से हटाया गया है। वहीं ऐसा भी माना जा रहा है कि अनुच्छेद 370, 35ए और तीन तलाक के मसले पर सरकार के समर्थन में खड़े होने के बाद वर्ग विशेष के डैमेज कंट्रोल के लिए ये फेरबदल किया गया है। प्रदेश अध्यक्ष बनाए गए मुनकाद अली और संसदीय दल के नेता बने श्याम सिंह यादव के जरिए बसपा ने माई (मुस्लिम-यादव) का दांव खेला है। हालांकि संसदीय दल के नेता के पद से हटाए जाने के मुद्दे पर सांसद दानिश अली ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया।
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इन मुद्दों पर मुखर रहे सांसद दानिश
अमरोहा। संसद के मानसून सत्र के पहले दिन ही सांसद दानिश अली ने बहस में हिस्सा लिया। उन्होंने जिले में केंद्रीय विद्यालय के स्थापित किए जाने की मांग की। सबसे आखिर में छह अगस्त को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट की बेंच स्थापित करने पर जोर दिया। इसके अलावा उन्होंने कश्मीर के मसले पर भी सत्र के शुरुआती दौर में ही दमदारी से बात रखी। जिस पर गृहमंत्री अमित शाह ने उनकी तारीफ की थी।
पूरब और पश्चिम का संतुलन की कवायद
अमरोहा। लोकसभा में दोनों महत्वपूर्ण पद पश्चिम के सांसदों के हाथ में थे। सांसद कुंवर दानिश अली को संसदीय दल का नेता जबकि नगीना के सांसद गिरीश चंद्र को मुख्य सचेतक की जिम्मेदारी दी गई। पूर्वांचल के सांसदों के पास कोई पद नहीं रहा। तीसरी बार के फेरबदल में पूर्वांचल के जौनपुर के श्याम सिंह यादव को संसदीय दल का नेता बनाया गया।