लखनऊ में आयोजित अधिवेशन में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के शक्ति प्रदर्शन और पास किए गए प्रस्तावों ने सत्ताधारी समाजवादी कुनबे में जारी घमासान को अब नया रंग दे दिया है। सियासी घमासान ने जिले का समाजवादी राजनीति को रोचक मोड़ पर पहुंचा दिया है। पार्टी में पैदा हुए नये हालात अब जिले के समाजवादी नेताओं का भी रुतबा तय करेंगे।
सत्ताधारी समाजवादी पार्टी मौजूदा घमासान के बाच जिस तरह से दो फाड़ दिख रही है, जिले में भी सपा की राजनीति दो विपरीत धाराओं में बहती रही है। एक धारा का नेतृत्व रेशम वस्त्र उद्योग मंत्री महबूब अली करते रहे हैं, जिसमें दर्जा राज्यमंत्री जावेद आब्दी, एमएलसी परवेज अली और पार्टी के जिलाध्यक्ष सुखवीर सिंह यादव हैं।
विरोधी खेमा खाद्य एवं रसद मंत्री कमाल अख्तर के साथ कदम ताल करते हुए चल रहा है, जिसमें विधायक अशफाक अली और पूर्व मंत्री चौ. चंद्रपाल सिंह शामिल हैं। इसमें मंडी धनौरा विधायक एम चंद्रा भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहे हैं।
एक खेमा जहां सपा सुप्रीमो का करीबी माना जाता है, वहीं दूसरा खेमा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नजर में अपने कार्यों से अच्छी छवि बनाए हुए हैं। टिकट वितरण को लेकर पिछले दिनों जारी हो चुकी दो सूचियों से भी ये बात सिद्ध हो चुकी है।
पार्टी सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव की ओर से जारी की गई पहली सूची में अमरोहा से कैबिनेट मंत्री महबूब अली, नौगावां सादात से हाजी इकरार अंसारी और धनौरा से उर्वशी को प्रत्याशी बताया गया था। हालांकि पार्टी की ओर से जारी की गई दूसरी सूची में हसनपुर से कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर का भी नाम था।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से जारी की गई सूची जैसी लोगों को उम्मीद थी वैसे ही उनके समर्थक खेमे के लोगों का नाम निकला। हसनपुर से कमाल अख्तर, नौगावां सादात से विधायक अशफाक अली खां और धनौरा से पूर्व मंत्री जगराम सिंह के नाम की घोषणा की गई थी। हालांकि सीएम की सूची से बी धनौरा से वर्तमान विधायक एम चंद्रा का टिकट कटने के पीछे जनता के बीच उनकी शिथिलता को कारण माना गया।
अब परिदृश्य बदल चुका है। अब भी शक्तियां अब मुख्यमंत्री के हाथ में आ गई हैं। रविवार को लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क मेें हुए समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधियों के राष्ट्रीय अधिवेशन में रामगोपाल यादव ने नेताजी मुलायम सिंह यादव को पार्टी का मार्गदर्शक और उनकी जगह अखिलेश यादव को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया।
इसके साथ ही शिवपाल यादव को प्रदेश अध्यक्ष पद और अमर सिंह को पार्टी से हटाने का भी प्रस्ताव भी पार्टी कार्यकर्ताओं के ध्वनि मत से पास कर दिया। हालांकि अधिवेशन में जिले के दोनों धड़ों ने शिरकत की, लेकिन टिकट वितरण के लेकर दोनों धड़ों में पैदा हुआ क्लेश आगे क्या गुल खिलाएगा ये वक्त ही बताएगा। पार्टी में पैदा हुए नये हालात आने वाले समय में अब जिले के समाजवादी नेताओं का भी रुतबा तय करेंगे।