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Amroha News: लावारिस शवों की दुखद कहानी, दफन जिंदगियां, अपनों को लौटने का इंतजार

Sun, 12 May 2024 04:14 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। शहर में हर साल सैकड़ों लाशें शिनाख्त नहीं होने से गुमनामी के ठप्पे के साथ दफन कर दी जाती हैं। अज्ञात लाशों की शिनाख्त के नाम पर पुलिस की कार्रवाई खानापूर्ति तक सीमित होती है। निर्धारित समयावधि में मृतक की शिनाख्त नहीं होने पर लाशों को दफन कर दिया जाता है। कई बार पुलिस की इस जल्दबाजी के कारण कब्र को उखड़वाना भी पड़ता है।
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पिछले दो महीने के भीतर जिलेभर में छह से अधिक लावारिस लाशें मिली हैं। नौगांवा सादात क्षेत्र में गर्भवती महिला की नौ टुकड़ों में बंटी लाश मिली थी। जिसे निर्मम तरीके से काटकर थैलों में पैक करके फेंका गया था। तमाम प्रयासों के बाद भी पुलिस पहचान नहीं कर सकी। इसके अलावा मंडी धनौरा रामगंगा पोषक नहीं में महिला और पुरुष का शव उतरते मिले थे। इसके अलावा गजरौला, हसनपुर और नौगांवा सादात क्षेत्र में नहर में अलग-अलग तीन लोगों के शव मिले थे। पुलिस ने तो इन लावारिस शवों का अंतिम संस्कार या सुपुर्द-ए-खाक कर दिया है, लेकिन अपनों का आज भी इनके लौटने का इंतजार है।
सीएमओ डॉ. एसपी सिंह ने बताया कि लावारिस लाशों की शिनाख्त में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए उनका डीएनए मैचिंग प्रोफाइल तैयार करने का नियम है। पंचनामा से फोरेंसिक टीम लाश के बाल, दांत, नाखूनों के नमूने सुरक्षित किए जाते हैं। ताकि जरूरत पड़ने पर परिजन शिनाख्त कर सकें। डीऑक्सीराइबोज न्यूक्लिक एसिड (डीएनए) टेस्ट के जरिए भी शिनाख्त की जा सकती है। हर इंसान में डीएनए का एक खास पैटर्न होता है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी एक से दूसरे जेनरेशन में ट्रांसफर होता है।
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आधार के बायोमीट्रिक सिस्टम से लावारिस लाश की पहचान एक मिनट में हो सकती है। पुलिस को एक पोर्टेबल बायोमीट्रिक सिस्टम दे दिया जाए तो लावारिस बॉडी का अंगूठा टच कराते ही सारी जानकारी मिल सकती है। पुलिस को शहर में रहने वाले बेघर लोगों की पूरी डिटेल रखनी चाहिए।
13 फरवरी को मंडी धनौरा क्षेत्र में रामगंगा पोषक नहर में शेरपुर पुलिस चौकी के पास पुल के पास नहर के पानी में महिला का शव उतरता मिला था। इसके कुछ देर बाद चौकी से 500 मीटर की दूरी पर वाहे नदी पुल के पास एक अज्ञात व्यक्ति का शव पानी में बह रहा था। पुरुष की उम्र करीब 47 वर्ष और महिला की उम्र करीब 35 साल बताई गई थी। दोनों की आज तक पहचान नहीं हो सकी है।
4 मार्च को नौगांवा सादात थानाक्षेत्र यहियापुर चौराहे से दो सौ मीटर दूर जंगल में यूकेलिप्टस पेड़ के नीचे झाड़ियों में दो बड़े कपड़े के थैले पड़े मिले थे। पुलिस को मौके से दो थैलों में महिला के शव के नौ टुकड़े मिले थे। महिला की हत्या के खुलासे के लिए आठ टीमें लगाई गई थीं। दिल्ली एनसीआर, मुरादाबाद मंडल समेत कई जिलों की पुलिस से मदद ली गई। लेकिन दो महीने बीतने के बाद भी पुलिस हत्यारों को पकड़ना तो दूर महिला की शिनाख्त करने में भी कामयाब नहीं हो सकी है।

एक मई को गजरौला के तिगरी गंगा में गंगाघाट के पास करीब 35 वर्षीय युवक का शव उतराता मिला था। वहीं, शव मिलने की जानकारी पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। शव की शिनाख्त करवाने की काफी कोशिश की गई लेकिन आज तक सफलता नहीं मिली। पुलिस ने दावा किया था कि गंगा में युवक का शव पीछे ही बहता हुआ तिगरी पहुंचा था।
26 अप्रैल को हसनपुर कोतवाली क्षेत्र गांव पिपलौती कलां के सामने गंगा में युवक का शव उतराता हुआ मिला था। काफी प्रयास के बाद भी शव की शिनाख्त नहीं हो सकी। शव पीछे से बहकर आया था, इसलिए पुलिस ने गजरौला, मंडी धनौरा समेत जनपद बिजनौर के गंगा किनारे के थानों को इस बाबत सूचना दी थी। लेकिन पुलिस शव की पहचान कराने में नाकाम साबित हुई है।
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