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Amroha News: खस्ताहाल गोशालाएं... और गर्मी में बेहाल गोवंश

Sun, 12 May 2024 04:12 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
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अमरोहा। गोवंशीय पशुओं को संरक्षण देने के साथ-साथ उनकी देखभाल के लिए संचालित गोशालाओं की स्थिति गर्मी के मौसम में बेहद चौंकाने वाली है। बढ़ते तापमान के बीच गोवंशीय पशु बेहाल हैं। कहीं पंखे नहीं लगे हैं तो कहीं पशु धूप में बांधे जा रहे हैं। कई जगह गोशालाओं में बिजली कनेक्शन नहीं है। उन्हें चारे के रूप में सूखा भूसा ही खिलाया जा रहा है।
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शनिवार को अमर उजाला की टीम ने जगह-जगह संचालित गोशालाओं की पड़ताल की तो व्यवस्थाएं चौपट मिलीं। विशेषकर हसनपुर और अमरोहा क्षेत्र में पशु धूप में बैठे मिले और सूखा भूसा ही उनके आगे पड़ा मिला। जबकि, अधिकारी गोवंश की सही देखरेख कराने का दावा करते रहते हैं।
कांड रोड पर अस्थाई गोवंश आश्रय स्थल बना हुआ है। वर्तमान में यहां पर 138 गोवंशीय पशु हैं। दोपहर के समय यहां बंधे पशुओं को सूखा भूसा खिलाया जा रहा था। टीन शेड होने के बाद कई पशु धूप में बंधे थे। टीन शेड में पंखे लगे थे, तो कई खराब हालत में थे। जबकि, इन दिनों गर्मी चरम पर है। गोवंशीय पशुओं हर सुविधा देने के दावे यहां खोखले होते नजर आ रहे हैं। जबकि, स्थानीय अधिकारी तरह-तरह के दावे करते रहते हैं।
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तहसील क्षेत्र की गोशालाओं में गर्मी के मौसम में पशु बेहाल है। उन्हें खाने के लिए सिर्फ सूखा भूसा मिल रहा है। जबकि गर्मी से बचने के लिए अधिकांश गोशालाओं में पंखे भी नहीं है। आदमपुर क्षेत्र की अस्थाई गोशाला में शनिवार दोपहर को पशु सूखा भूसा खाते मिले। उनके ऊपर गर्मी से बचने के लिए पंखे की व्यवस्था नहीं थी। वहीं दढि़याल की गोशाला में भी पशुओं को हरा चारा नहीं मिल रहा है। वहां भी सूखा चारा खाने को पशु मजबूर हैं।गंगेश्वरी ब्लॉक के गांव मंगरौली में स्थित गोशाला में कुछ पशुओं सामने हरा चारा मिला। जबकि कुछ पशु बिना हरे चारे के सूखा भूसा खाते मिले। साथलपुर में स्थित गोशाला में भूख मिटाने के लिए कई पशु पराली खाते नजर आए। जिनकी सेहत भी खराब नजर आई।

क्षेत्र के गांव फरीदपुर इम्मा में अस्थाई गोशाला संचालित है। वर्तमान में यहां 108 गोवंशीय पशु को संरक्षित किया गया है। भीषण गर्मी के बीच पशु यहां बेहाल मिले। टीन शेड पर न तो पंखे थे और न ही बिजली को कोई इंतजाम। पशुओं को खाने के लिए सूखा भूसा दिया जा रहा है। कुछ पशु खुले में धूप में बंधे मिले। यही चोकर आदि की भी यहां व्यवस्था नहीं है।
क्षेत्र में स्थित कान्हा गोशाला में वर्तमान में 104 गोवंशीय पशुओं संरक्षित किया गया है। कर्मचारियों की मानें तो यहां मात्र 80 पशुओं को रखने की क्षमता है, लेकिन उससे अधिक पशुओं को रखा जा रहा है। ऐसे में गाेवंश को सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई पशु धूप में खुले में छोड़ रखे हैं। वहीं, चारे में भूसा ही मिल रहा है। समय पर चारा न मिलने पर पशुओं की सेहत भी बिगड़ने की कगार पर है।
अधिकारियों की मानें तो जिले में 22 गोशालाएं संचालित हैं। एक पशु के लिए 55 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मिलते हैं। लेकिन, हालात यह हैं कि कई जगह क्षमता से अधिक पशु होने के चलते उन्हें चारा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है और गर्मी में बेहाल हैं।
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