गजरौला। रेल की पटरियों पर बन जाने वाले छाेटे-छोटे गड्ढों को दूर करने के लिए रेलवे स्टेशन को जल्द आरजीए मिल सकती है। इस मशीन से पटरियों की घिसाई की जाने पर उनकी उम्र बढ़ जाती है। 80 करोड़ रुपये कीमत की मशीन मिल जाने पर रेलवे के रेलपथ विभाग को काम कराने में आसानी रहेगी।
आमतौर पर देखा जाता है कि रेल की पटरियों पर जगह-जगह छोटे-छोटे गड्ढे बन जाते हैं। जिससे ट्रेन गुजरते समय काफी आवाज आती है। इन गड्ढों के बन जाने पर रेल की पटरियां भी कमजोर हो जाती हैं। कई बार गड्ढे अधिक बड़े हो जाने पर ट्रेन डिरेल का खतरा बढ़ जाता है। गड्ढों को रेलवे के कर्मचारियों से सही कराने में रेलवे के रेलपथ विभाग को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार गड्ढे सही करने में ट्रेनों का संचालन बाधित हो जाता है।
इस परेशानी को दूर करने के लिए रेलपथ विभाग को जल्द ही आरजीएम (रेल ग्रांडिंग मशीन) मिलने की संभावना है। 80 करोड़ कीमत की मशीन पटरियों पर बने गड्ढों को घिसने का काम करेगी। सीनियर सेक्शन इंजीनियर (रेलपथ) महेंद्र सिंह का कहना है कि उत्तर रेलवे में अभी तक दो मशीन हैं। एक गजरौला को मिल रही है। यह गजरौला रेलवे स्टेशन की बड़ी उपलब्धि है। इसी मशीन को आसपास के जिलों में भेजा जाएगा।