अमरोहा। धोखाधड़ी के मामले में हिरासत में लिए गए बैंक ऑफ बड़ौदा के सेवानिवृत्त शाखा प्रबंधक को छह घंटे की पूछताछ के बाद पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी प्रबंधक ने जमीन पर ऋण देकर राजस्व विभाग से तथ्यों को छिपाए रखा था। बाद में बंधक जमीन को आरोपी दंपती ने बेच दिया था। प्रकरण में न्यायालय के आदेश पर दंपति सहित पांच लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी। नौ महीने चली विवेचना में तत्कालीन प्रबंधक भी आरोपी पाया गया है। पुलिस ने आरोपी प्रबंधक को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
एसओ सुरेश गौतम ने बताया कि अमरोहा-जोया मार्ग स्थित बेशकीमती करीब 40 से 45 बीघा जमीन से जुड़ा है। यहां रहने वाले स्व. बेचेलाल वर्मा की पत्नी उमा वर्मा ने चार मार्च 2020 को न्यायालय के आदेश पर थाने में ब्रिजेश कुमारी उनके पति विशन स्वरूप माहेश्वरी निवासी मोहल्ला जट, बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, ऋण विभाग के तत्कालीन कर्मचारी सहित पांच के खिलाफ धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई थी। उमा वर्मा का आरोप था कि 8 अप्रैल 2003 को जोया रोड पर खसरा नंबर 3319 में एक प्लाट ब्रजेश कुमारी और उनके पति विशन स्वरूप माहेश्वरी से खरीदा था। इस दौरान उन्होंने जमीन पर कोई विवाद या बैंक लोन नहीं होने का दावा किया था। प्लाट खरीने के बाद मकान बनाकर पीड़िता उमा वर्मा अपने परिवार के साथ रहने लगीं। लेकिन, फरवरी 2013 में उन्हें पता चला कि जमीन मालिक ब्रजेश कुमारी के बेटे राजकुमार माहेश्वरी ने बरेली कार्पोरेशन बैंक से 21 दिसंबर 1987 को अपनी फर्म मेसर्स माहेश्वरी इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर ऋण लिया था। लेकिन, इन लोगों ने राजस्व विभाग से यह छिपाए रखी। बाद में बरेली कार्पोरेशन बैंक का विलय बैंक आफ बड़ौदा में हो गया थ। ऋण की अदायगी नहीं होने पर बैंक ने जमीन की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर दी। 20 फरवरी 2001 को डैव्टस रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) दिल्ली ने जमीन को नीलाम कर दिया था। इस संबंध में भी बैंक अफसरों ने राजस्व विभाग को कोई सूचना नहीं दी थी। एफआईआर के आधार पर पुलिस ने मुख्य आरोपी दंपती ब्रिजेश कुमारी और उनके पति विशन स्वरूप माहेश्वरी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था। पिछले नौ महीने से दरोगा परशुराम मामले की विवेचना कर रहे थे। इस बीच तत्कालीन शाखा प्रबंधक अनिल अग्रवाल निवासी बरेली सेवानिवृत्त हो गए।
शनिवार की शाम करीब छह बजे पुलिस ने उन्हें बरेली स्थित उनके घर से हिरासत में ले लिया था। थाने लाकर करीब छह घंटे तक पूछताछ की। जिसके बाद रात्रि करीब बारह बजे पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। विवेचक दरोगा के मुताबिक आरोपी प्रबंधक ने 1987 में 12 लाख रुपये का ऋण दिया था। लेकिन, इसकी जानकारी राजस्व विभाग से छिपाए रखी गई। जमीन मालिक ने ऋण और ब्याज भी जमा नहीं किया था। बावजूद इसके फर्जीवाड़ा करके ऋण का आंकड़ा बढ़ाता गया और सवा करोड़ रुपये तक का खेल कर डाला था। आरोपी राजस्व विभाग में ऋण का लेखा-जोखा नहीं होने का फायदा उठाकर लोगों को बंधक जमीन को बेचते रहे थे।