अमरोहा। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड में लगातार खराब प्रदर्शन कर रहे अमरोहा जिले की विकास रफ्तार पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। बीते पांच महीनों से जिले की रैंकिंग लगातार नीचे बनी हुई है और मई माह की रैंकिंग में भी अमरोहा 62वें स्थान पर रहा। विकास कार्यों को लेकर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं वर्षों से अधूरी पड़ी हैं, जबकि कुछ योजनाएं तो अब तक कागजों से बाहर ही नहीं निकल सकी हैं।
जिले की सबसे बड़ी परियोजनाओं में शामिल मध्य गंगा नहर परियोजना पिछले चार वर्षों से अधर में लटकी हुई है। करीब 4900 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना का काम रजबपुर क्षेत्र के कूबी, रामपुर घना और मोहनपुर गांवों में किसानों के विरोध के कारण रुका हुआ है। दो साल तक क्षेत्र के किसान वर्ष 2011 के बजाय मौजूदा सर्किल रेट के अनुसार चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे थे। प्रशासन और किसानों के बीच कई दौर की वार्ता के बावजूद समाधान निकला। बावजूद इसके छह महीने बाद भी परियोजना अधर में पड़ी है। परिणामस्वरूप मंडल के 12 ब्लॉकों और 1850 गांवों के करीब 4.10 लाख किसानों को मिलने वाला लाभ भी अटका हुआ है। डीएम ने बताया कि लोक निर्माण विभाग की ओर से कार्यों का मूल्यांकन पहले हो गया और धन आवंटन बाद में हुआ। इसके अलावा जननी सुरक्षा योजना में अभी एक सप्ताह पहले ही पैसा आया है। शासन को पत्र भेजा जा रहा है।
छह साल बाद भी नहीं बन सका कैलसा रेलवे ओवरब्रिज कैलसा रेलवे क्रॉसिंग पर रोजाना लगने वाले जाम से लोगों को राहत दिलाने के लिए वर्ष 2020 में रेलवे ओवरब्रिज बनाने की घोषणा की गई थी। करीब 60 करोड़ रुपये की लागत वाले इस प्रोजेक्ट का प्रारंभिक खाका भी तैयार हो चुका था, लेकिन पांच वर्ष बाद भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। नतीजतन हजारों लोगों को आज भी रेलवे फाटक पर लंबे जाम का सामना करना पड़ रहा है।
गजरौला में रोडवेज की क्षेत्रीय कार्यशाला बनाने की योजना भी अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी है। अधिकारियों ने कई बार जल्द निर्माण शुरू होने का दावा किया, लेकिन छह बीघा भूमि पर प्रस्तावित कार्यशाला का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया। वहीं हसनपुर क्षेत्र की पहचान बनी सहकारी चीनी मिल की पेराई क्षमता बढ़ाने की मुख्यमंत्री की वर्ष 2018 की घोषणा भी आठ साल बाद अधूरी है। किसानों को उम्मीद थी कि क्षमता वृद्धि से गन्ना भुगतान और पेराई व्यवस्था बेहतर होगी, लेकिन अभी तक योजना अमल में नहीं आ सकी है।
रोजगार और उद्योगों की राह में भी बाधाएं
सरकार युवाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराने की योजनाएं चला रही है, लेकिन अमरोहा में बैंकिंग व्यवस्था इन योजनाओं की राह में बड़ी बाधा बन रही है। उद्योग विभाग के आंकड़ों के अनुसार हजारों आवेदन बैंकों को भेजे गए, लेकिन बड़ी संख्या में फाइलें लंबित रहीं और अधिकांश आवेदनों को विभिन्न कारणों से निरस्त कर दिया गया। इससे युवाओं का उद्यमी बनने का सपना अधूरा रह रहा है।
शहर के विकास के लिए लागू अमृत महायोजना भी अब तक जमीन पर नहीं उतर सकी है। दो वर्ष बीतने के बाद भी रिंग रोड, ट्रांसपोर्ट नगर और औद्योगिक विकास जैसी प्रमुख योजनाओं पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। इसके अलावा महायोजना के दायरे में आने वाली कई श्रेणीबद्ध जमीनों की खरीद-फरोख्त भी प्रभावित हो गई है।
शहर से लेकर गांव तक अनेक सड़कें बदहाल स्थिति में हैं। गड्ढामुक्ति अभियान के बावजूद कई मार्गों पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं, जिससे लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों की धीमी गति को भी जिले की लगातार गिरती रैंकिंग का प्रमुख कारण माना जा रहा है। अधूरी परियोजनाएं, धीमी प्रशासनिक कार्यशैली और जमीनी स्तर पर विकास कार्यों की कमी ही अमरोहा की खराब रैंकिंग की सबसे बड़ी वजह बनती जा रही है। अब देखना यह होगा कि जिले की विकास मशीनरी इन चुनौतियों से कब तक पार पाती है और जनता को लंबे समय से प्रतीक्षित योजनाओं का लाभ कब मिल पाता है।