गजरौला। बाढ़ जैसी मुसीबत से खादर के ग्रामीण हर साल गुजरते हैं, मंगलवार को कुछ ऐसी ही दिक्कत गांव के निरीक्षण के लिए गए एसडीएम को उठानी पड़ी। रामगंगा पार शीशोवाली गांव जाने के लिए एसडीएम को अपनी जीप जुगाड़ कर बनाई गई दो नावों पर रखवानी पड़ी। उस पार पहुंचे एसडीएम ने गांव वालों से कहा कि कभी भी गंगा और रामगंगा पोषक नहर का पानी फिर से गांव में घुसकर कहर बरपा सकता है। इसलिए समय रहते गांव खाली कर सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। आपके लिए प्रशासन द्वारा पतेईएमन के स्कूल में रहने-खाने की व्यवस्था कराई जाएगी। इतना ही नहीं गंगा का पानी गांव में घुसने से रोकने के लिए जेसीबी मशीन और मनरेगा श्रमिकों की मदद से धारा मोड़ने का काम कराया जाएगा।
मंगलवार को एसडीएम विवेक यादव और तहसीलदार सदानंद सरोज हर बार बाढ़ के सीजन में बाढ़ से प्रभावित होने वाले गंगा और रामगंगा के पार स्थित गांव शीशोवाली निरीक्षण को पहुंचे। गांव में पहुंचने के लिए एसडीएम की सरकारी गाड़ी को कड़ी मशक्कत कर नावों पर रखवाया गया। इसके बाद वे अपनी टीम के साथ वहां पहुंचे। एसडीएम ने गांव में घूमकर खेतों को भी देखा। वहां मौजूद ग्रामीण मंगत सिंह, सुनील कुमार आदि ने उन्हें बताया कि हर बार बाढ़ यहां अपना कहर बरपाती है। गांव वालों को पलायन तक करना पड़ता है। एसडीएम ने बताया कि इस बार गांव में गंगा की धार को मोड़ने के लिए काम कराया जाएगा। साथ ही उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि बाढ़ सिर पर है। इसलिए खतरा मोल न लें। समय रहते यहां से सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। प्रशासन उनके लिए पतेईएमन के स्कूल में रहने-खाने की व्यवस्था कराएगा। इस मौके पर लेखपाल ओमकार सिंह के साथ ही सोराज सिंह, मुकेश, रामचंद्र आदि भी रहे।
बारिश होते ही सिहर उठते हैं गंगा पार के ग्रामीण
गजरौला। इन दिनों गंगा और रामगंगा उफान पर है। पहाड़ों और मैदानी क्षेत्रों में बारिश भी हो रही है। ऐसे में खादर में गंगा पार स्थित चालीस से अधिक गांवों के हजारों ग्रामीणों के होश उड़े हुए हैं। बारिश शुरू होते ही उनमें सिहरन दौड़ जाती है। उन्हें बाढ़ से घिरे होने का खतरा सताने लगता है। बता दें कि मंडी धनौरा तहसील क्षेत्र में चालीस से अधिक गांव गंगा और रामगंगा पोषक नहर के पार स्थित हैं। गंगा में आई बाढ़ का पानी जब अलीनगर से पोषक नहर में बैक मारता है तो पूरा इलाका बाढ़ की चपेट में आ जाता है। वैसे भी अब इन गांवों में पहुंचने के लिए पैंटून पुल हटा लिए गए हैं। ऐसे में इन गांवों के ग्रामीणों को चारों तरफ से मुसीबतों ने घेरा हुआ है।