रोडवेज की बसों में अक्सर महिला यात्रियों के लिए आरक्षित सीट पर पुरुष यात्री कब्जा कर लेते हैं। ये नियमों का तो उल्लंघन करते ही हैं, बस में खड़ी महिलाओं को परेशान देखकर भी इनकी संवेदना नहीं जागती। यह देखकर भी कंडक्टर चुप्पी साधे रहते हैं।
शिकायत करने पर वो उल्टा महिलाओं को ही समझाने लगते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि, बसों में महिलाओं के लिए सीट आरक्षित लिखना किस काम का है। मंगलवार को भी एक रोडवेज बस में यही नजारा देखने को मिला। मुरादाबाद से रोडवेज बस में सवार हुई महिला यात्रियों को सीट नहीं मिली। महिला ने कंडक्टर से सीट दिलवाने के लिए मिन्नतें की, लेकिन उसने भी रिजर्व सीट पर बैठे पुरुष यात्री को उठाने की जहमत नहीं उठाई। कंडक्टर से उसकी झड़प भी हुई, मगर कोई नतीजा नहीं निकला।
इनके लिए बस में सीट रिजर्व
रोडवेज बसों में महिलाओं, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, विकलांगों, सांसदों/ विधायकों तथा मान्यता प्राप्त पत्रकारों के बैठने के लिए सीट रिजर्व होती है।
संस्कारों में गिरावट
बस में सफर कर रहीं संतोष गुर्जर कहती हैं कि, जिस देश में नारियों की पूजा की अवधारणा रही है, वहां परेशान महिलाओं के लिए अपनी सीट देने के बजाय आरक्षित सीट पर कब्जा करना संस्कारों में गिरावट दर्शाता है। गर्भवती और गोद में बालक लेकर सफर करने वाली महिलाओं के लिए तो जरूर सीट उपलब्ध कराई जानी चाहिए। शिक्षिका पलक गौतम का कहना है कि बसों में महिला सवारियों का ख्याल रखना कंडक्टर के साथ ही पुरुष यात्रियों की भी जिम्मेदारी है। जहां तक संभव हो पुरुष सवारियों को महिला एवं विकलांगों के लिए आरक्षित सीट पर नहीं बैठना चाहिए। राजेश्वरी वर्मा कहती हैं कि बस रोडवेज की हो चाहे प्राइवेट महिला सवारियों का सफर करना मुश्किल होता है। लेकिन कोई भी उनके लिए सीट नहीं छोड़ता है। दुख की बात यह है महिला रिजर्व सीट पर भी पुरुष कब्जा जमाए बैठे रहते हैं।
अफसर बोले-
क्षेत्रीय सहायक प्रबंधक नरेंद्र कुमार गंगवार का कहना है कि महिला रिजर्व सीट पर सफर कर रहे पुरुष यात्री को उठाने के लिए कंडक्टर ने कोई एक्शन नहीं लिया तो ये गलत है। रिजर्व सीट न हो तो भी महिला यात्री को बैठाने का इंतजाम करना प्राथमिकता होनी चाहिए।
नहीं हो रहा शासन के आदेश का पालन
महिला सवारियों की दिक्कत को देखते हुए परिवहन निगम की बसों में आगे की तीन सीटें आरक्षित की गई हैं। एक सीट पर तीन सवारियां बैठ सकती हैं। चालक या परिचालक महिलाओं की रिजर्व सीट से पुरुष यात्रियों को उठाने की कोशिश नहीं करते। जिसके कारण महिलाएं खड़े होकर सफर करने को मजबूूर होती हैं।
रोडवेज व प्राइवेट बसों में महिलाओं के लिए आगे की थ्री सीटर तीन सीट रिजर्व करने का प्रावधान है। इन पर नौ महिलाएं बैठ सकती हैं। सभी क्षेत्रीय सहायक प्रबंधकों को इसका पालन कराने के निर्देश दिए हैं। कड़ाई से पालन कराया जाएगा- पीआर वेलवरियार क्षेत्रीय प्रबंधक मुरादाबाद परिवहन निगम।