अमरोहा। बिजली के फर्जी नोटिस के मामले में जांच टीम को अहम सबूत हाथ लगे हैं। स्थलीय जांच और कार्यालय के रिकार्ड के मिलान में भी गड़बड़झाला सामने आया है। उपभोक्ताओं को जारी नोटिस का बिजली निगम के रिकार्ड से मिलान स्पष्ट नहीं हो रहा है। उसके आधार पर जांच आखिरी दौर में है। उच्चाधिकारियों ने मामले में जांच टीम को जीरो टॉलरेंस नीति का फरमान दिया है। जांच जल्द पूरी होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि छुट्टी के बाद रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज देंगे। कार्रवाई की आशंका से इंजीनियर और कर्मचारियों में हड़कंप है।
जिले का विद्युत वितरण खंड द्वितीय कार्यालय शुरू से विवादों में घिरा रहा है। इंजीनियर और अफसरों की मिलीभगत से रकम वसूली का धंधा परवान चढ़ रहा है। वर्ष 2018 में बिजली निगम की टीम ने गांव में कार्रवाई की थी। आरोप है कि नौगांवा सादात के नगली पतवारी गांव में 32 लोगों को फर्जी नोटिस जारी किए गए थे। गांव के लोगों से मामले को मैनेज करने के लिए रुपये वसूले गए। कुछ दिन पहले फर्जी नोटिस का मामला सामने आया था। अधिशासी अभियंता प्रथम पीपी सिंह को मामले की जांच सौंपी थी। उन्होंने नगली पतवारी गांव में स्थलीय सत्यापन किया। गांव के लोगों के बयान दर्ज किए। इसके बाद उन्होंने रिकार्ड से मिलान किया। सत्यापन के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए। ऐसा माना जा रहा है कि होली के बाद जांच तैयार हो सकती है। बिजली निगम में इसको लेकर हड़कंप है। दरअसल मामला प्रकाश में आने के बाद बिजली इंजीनियर भी जोखिम लेने से कतरा रहे हैं।
मामले की जांच की गई है। संबंधित लोगों से जानकारी ली गई है। रिकॉर्ड से मिलान किया गया है। जल्द ही रिपोर्ट अफसरों को भेजेंगे। - पीपी सिंह, जांच अधिकारी/अधिशासी अधिकारी प्रथम।