अमरोहा। सावन माह 22 जुलाई शुरू हो रहा है। उसके साथ ही कांवड़ियों के जत्थे भी निकलने लगेंगे लेकिन उनकी राह सुगम करने के लिए ठोस तैयारी नहीं की जा सकी है। नेशनल हाईवे से लेकर मुख्य मार्गों पर बने बड़े-बड़े गड्ढे उनकी राह में मुश्किल करेंगे। कांवड़ियों बदहाल सड़कों से ही गुजरने को मजबूर होना पड़ेगा। सड़कों में बने गहरे गड्ढे, उखड़ी पड़ीं बजरी शिवभक्तों की राह में रुकावटें पैदा कर सकती हैं। लाखों की संख्या में कांवड़िये दिल्ली लखनऊ नेशनल हाईवे से लेकर बिजनौर समेत अन्य मार्गों से गुजरते हैं। सभी की हालत काफी खराब है।
21 जुलाई को पूर्णिमा हो जाने पर अगले दिन 22 जुलाई से कांवड़ियों के जत्थे कांवड़ में गंगा जल लाने के लिए रवाना होने लगेंगे। अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, पीलीभीत के कांवड़िये ब्रजघाट से कांवड़ में गंगा जल भर कर ले जाते हैं और अपने निकट के मंदिर में भगवान शिव का सोमवार की सुबह जलाभिषेक करते हैं। पूरे महीने कांवड़ियों के जत्थे हर-हर बम का उद्घोष करते हुए गंतव्य को जाते हैं। डीजे पर डांस करते हुए मंजिल तय करते हैं। उनका मुख्य मार्ग दिल्ली-लखनऊ हाईवे है। जिस पर ब्रजघाट से लेकर गजरौला तक कई जगह गड्ढे बने हैं। कई में पानी भर गया। जिसकी वजह से वह दिखाई नहीं देते। उनमें वाहनों का पहिया आ जाने पर हादसा होता है। कांवड़ यात्रा में ये गड्ढे शिवभक्तों की परेशानी का सबब बनेंगे।
अमरोहा से भारी संख्या में कांवड़िये गुजरने शुरू हो जाते हैं। यहां से हरिद्वार से होते हुए मुरादाबाद, बरेली, चंदौसी, संभल आदि के शहरों के लिए कांवड़िये गुजरते हैं, लेकिन बिजनौर से नौगांवा और अमरोहा मार्ग बुरी तरह बदहाल है। कदम-कदम पर बड़े-बड़े गड्ढे बने हुए हैं। जिससे कांवड़ियाें को परेशानी झेलनी पड़ सकती है। विशेषकर रात्रि में उनकी राह और भी कठिन हो जाएगी। यात्रा शुरू होने में अब मात्र नौ दिन का ही समय बचा है, लेकिन अभी तक इसके लिए कोई पहल नहीं हो सकी है।
सावन माह शुरू होने वाला है। भगवान भोलेशंकर की आराधना करने के लिए भोले के भक्त हरिद्वार और ब्रजघाट से जल लेकर पैदल ही अपने क्षेत्र में लौटेंगे, लेकिन उनकी राह आसान नहीं है। हसनपुर-रहरा मार्ग पर गांव मंगरौला और गांव रुस्तमपुर में मार्ग की हालत जर्जर अवस्था में जहां से शिवभक्त गुजरेंगे। उधर, ढबारसी से आदमपुर को जोड़ने वाला छह किमी मार्ग जर्जर अवस्था है। इस मार्ग पर कंकड़ पत्थर पड़े हुए हैं। जहां से शिवभक्त होकर आदमपुर के पातालेश्वर महादेव मंदिर में पहुंचकर जलाभिषेक करेंगे।