ज्यों ज्यों ठंड और कोहरा बढ़ रहा है त्यों त्यों आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में आ रही है। इससे बचाव के लिए उद्यान विभाग ने किसानों को सतर्क किया है और उपायों पर अमल करने के लिए कहा है। जिला उद्यान अधिकारी नत्थू लाल गंगवार ने कहा कि आलू की फसल अगेती और पिछेती झुलसा रोग के प्रति अत्यंत संवदेनशील होती है। प्रतिकूल मौसम विशेषकर बदलीयुक्त बूंदा-बांदी एवं नम वातावरण में झुलसा रोग का प्रकोप तेजी से फैलता है। फसल को भारी क्षति पहुंचती है।
उन्होंने कहा कि विकसित इंडो-ब्लाइटकास्ट (पैन इंडिया मॉडल) से पिछेता झुलसा बीमारी का पूर्वानुमान लगाया गया है। इसके तहत मौसम के अनुकूलता के आधार पर आलू की फसल में पिछेता झुलसा बीमारी निकट भविष्य में आने की संभावना है। पिछेता झुलसा बीमारी के प्रकोप से पत्तियां सिरे से झुलसना प्रारंभ होती हैं और तीव्रगति से फैलती है। पत्तियों पर भूरे काले रंग के जलीय धब्बे बनते हैं तथा पत्तियों के निचली सतह पर रूई की तरह फफूं द दिखाई देती है। बदलीयुक्त 80 प्रतिशत से अधिक आर्द्र वातावरण एवं 10-20 डिग्री सेंटीग्रेड तापक्रम पर इस रोग का प्रकोप बहुत तेजी से होता है। 2 से 4 दिनों के अंदर की संपूर्ण फसल नष्ट हो जाती है। अगेती झुलसा में पत्तियां बीच से झुलसना प्रारंभ होती हैं।