गजरौला(अमरोहा)। सात जून 2020 की रात को दवा बनाने वाली कंपनी तेवा एपीआई लिमिटेड में हुए गैस रिसाव के मामले में शुक्रवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सुनवाई हुई। एनजीटी ने माना है कि तेवा फैक्टरी से प्रदूषण हो रहा है और इससे स्थानीय लोगों को दिक्कत हो रही है। वहीं उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी अपनी रिपोर्ट दे दी है। इस प्रकरण में अंतिम सुनवाई 17 फरवरी को होगी। प्रदूषण फैलाने के मामले में फैक्टरी पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति (पेनाल्टी) भी लग सकती है।
शुक्रवार की सुबह साढ़े दस बजे दिल्ली में एनजीटी कोर्ट में गजरौला की तेवा एपीआई लिमिटेड के प्रदूषण को लेकर चर्चा हुई। सुप्रीम कोर्ट एवं एनजीटी में अधिवक्ता गजरौला निवासी मानसी चहल और उनके सीनियर शारिक जैदी ने कोर्ट को बताया कि सात जून को गजरौला में तेवा फैक्टरी के गैस रिसाव से अफरातफरी मच गई थी और लोगों को सांस लेने में दिक्कत हुई थी। उप्र एवं केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने कोर्ट में बताया कि तेवा फैक्टरी से सात जून को गैस लीक हुई थी। यह भी बताया कि संयुक्त जांच टीम ने भी निरीक्षण के दौरान पाया था कि यहां प्रदूषण की रोकथाम के लिए यंत्र नहीं लगे हुए थे। स्क्रबर भी काम करते नहीं मिला। अधिवक्ता मानसी चहल ने बताया कि एनजीटी ने भी मान लिया है कि गजरौला में तेवा फैक्टरी प्रदूषण फैला रही है। उन्होंने इसके लिए फैक्टरी पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति (पेनाल्टी) लगाने को कहा। वहीं कोर्ट में मौजूद फैक्टरी के अधिवक्ता कोई संतोषप्रद जवाब नहीं दे सके और दो दिन का समय मांगा। अब कोर्ट ने अंतिम सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि तय की है। वहीं इस संबंध में तेवा के एसोसिएट डायरेक्टर एके सिंह का पक्ष जानने के लिए उनका फोन रिसीव नहीं हो सका।