अमरोहा। जश्ने ईद-ए-मिलादुन्नबी के सिलसिले में सोमवार रात नातिया महफिल का आयोजन किया गया। शायरों ने रसूले खुदा की शान में एक से बढ़कर एक कलाम सुनाकर श्रोताओं की खूब दाद हासिल की।
मोहल्ला नौबतखाना में दिवंगत डाॅ.मोहम्मद अहसान हुसैन के आवास पर महफिल हुई। मुफ्ती सैय्यद मोहम्मद अफ्फान मंसूरपुरी ने अपनी जिंदगी को सीरत-ए-नबी के सांचे में ढालने की सीख दी। कहा कि ऐसा करने से ही हमारे घरों में मोहब्बत, मोहल्लों में अमन और समाज में इंसाफ कायम हो सकता है। सीरत का पैगाम ये ही है कि हम झूठ, नफरत और जुल्म से दूर रहें। महफिल का आगाज तिलावते कुरआन से कारी अहसान उल्लाह ने किया। डाॅ. जमशेद कमाल ने कहा...मेरी निगाहें तखय्युल है उनकी उंगली पर, वो और होंगे जो टुकड़े कमर के देखते हैं।
जुबैर इब्ने सैफी ने ऐसे कहा, दरे नबी पे जिसे कैद कर के रखा जाए, दुआ करो के वह मुजरिम कभी बहाल न हो। डाॅ. लाडले रहबर ने इस तरह कहा, तबसरा कौम पे करना है तो ये लाजिम है, पहले खुद अपना भी किरदार संवारा जाए। डाॅ.मुबारक अमरोहवी ने पढ़ा, जो है हसरत तो एक हसरत है, हम भी कहलाएं खादिमाने रसूल। मौलाना साद अमरोहवी ने यूं पढ़ा...नात लिखना तो हकीकत में बहुत भारी है, वो तो रब का है करम फैज-ए-नबी जारी है।
इनके अलावा नासिर अजीज एडवोकेट, हबीब अहमद, डॉ.नासिर अमरोहवी अन्य शायरों ने भी अपने-अपने कलाम पेश किए। महफिल की अध्यक्षता इंजीनियर दानिश सिद्दीकी ने जबकि संचालन मास्टर असलम उस्मानी व शीबान कादरी ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान महबूब हुसैन जैदी, नईम-उल-हक, डॉ.जफर महमूद, खुर्शीद हैदर जैदी, चंदन नकवी आदि मौजूद रहे। संयोजक असलम उस्मानी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।