अमरोहा। जश्न-ए-बूतराब में सूफी कव्वाल जावेद अहमद खान रामपुरी ने मन कुंतो मौला, भर दो झोली मेरी या मोहम्मद, पुकारो मेरे मौला को पुकारो और दमा दम मस्त कलंदर कलाम पेश करके समा बांध दिया। हजरत अली की यौम-ए-विलादत के सिलसिले में दोस्त अली कल्चरल फोरम के संयोजन में मोहल्ला कटकुई स्थित दोस्त अली हाउस में चल रहे दो दिवसीय कार्यक्रम जश्न-ए-बूतराब में सोमवार रात कव्वाली की महफिल सजाई गई। कार्यक्रम के आगाज पर प्रोफेसर नाशिर नकवी ने सूफियाना कलाम की अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि सूफियाना कलाम दिलों में मोहब्बत के पैगाम को आम करता है।समाज से नफरत को दूर करता है। रामपुर से पहुंचे रेडियो-टीवी आर्टिस्ट एवं विख्यात कव्वाल जावेद अहमद खान ने हजरत अली की शान में कलाम सुनाकर महफिल में समा बांध दिया। हारमोनियम से निकले सूर और साज के बीच कव्वाली दमा दम मस्त कलंदर पर महफिल में मौजूद लोग झूमने पर मजबूर हो गए। अंत में सूफी कव्वाल जावेद अहमद खान को सूफियाना अवार्ड से भी सम्मानित किया गया। इस दौरान मोहम्मद अली नकवी, प्रोफेसर नाशिर नकवी, अली आबिदी अमरोही आदि मौजूद रहे।