नए सत्र के लिए इंग्लिश मीडियम स्कूलों की ओर से की गई आठ से दस प्रतिशत फीस वृद्धि ने अभिभावकों को टेंशन में ला दिया है। होली में खर्च के बाद अब स्कूलों की मनमानी फीस वृद्धि ने सभी का मूड खराब कर दिया है। इससे अभिभावकों को घर का बजट संभालना मुश्किल लग रहा है। सभी को एकमुश्त इतनी शुल्क वृद्धि नागवार गुजर रही है, मगर उन्हें बच्चों का अच्छी शिक्षा की भी फिक्र भी है। बातचीत में उनका दर्द सामने आ जाता है।
इसको लेकर ज्यादातर स्कूलों की ओर से मनमानी फीस वृद्धि पर नियंत्रण के लिए जिले में कमेटी के गठन की जरूरत पर जोर दे रहे हैं। अभिभावक राकेश वर्मा का कहना है हर साल निजी स्कूल फीस में वृद्धि कर रहे हैं। इससे अभिभावकों का बजट बिगड़ रहा है। बोले- फीस निर्धारण के लिए मानक तय किए जाने चाहिए। फीस नियंत्रण को जिले में अफसरों की निगरानी में कमेटी गठित हो तो अच्छा।
अभिभावक संगीता गुप्ता का कहना है कि स्कूलों की फीस वृद्धि से पहले की बनी बनाई योजना गड़बड़ा गई है। बेतहाशा फीस वृद्धि पर अंकुश लगना चाहिए और जो ज्यादा फीस वसूले उस पर कार्रवाई भी हो। अभिभावक रेखा गुप्ता का कहना है कि शासन को इंग्लिश मीडियम स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कदम उठाए जाने चाहिए। शासन स्तर से कक्षावार फीस निर्धारित की जाए तो अच्छा।
अभिभावक रूकैया बानो का कहना है कि प्रशासन को निजी स्कूलों पर नियंत्रण रखना चाहिए। बिल्डिंग समेत तमाम अन्य मदों के तहत अनावश्यक वसूली की जाती है। स्कूल से किताबें, ड्रेस, बैग आदि खरीदने की शर्तें भी अभिभावकों पर नहीं थोपी जानी चाहिए। अभिभावक विशाल गोयल का कहना है कि निजी स्कूल फीस लेट जमा करने पर भारी भरकम पेनॉल्टी वसूलते हैं। इसे तत्काल प्रभाव से बंद कराया जाना चाहिए। हर साल एडमिशन के नाम पर होने वाली फीस वसूली पर भी रोक लगनी चाहिए।