गजरौला(अमरोहा)। ब्लाक के खादर में स्थित गांव चकनवाला में गुजर रही रामगंगा पोषक पर गांव शीशोवाली के सामने रखा 18 पीपे वाला पैंटून पुल हटाने की तैयारी है। इसके हटने से 19 गांवों के ग्रामीणों की यात्रा कठिनाई भरी होगी। ग्रामीण बिना पुल के ही नाव आदि साधनों से शहर आने के लिए सफर करेंगे। हालांकि इसे 15 जून को बरसात का सीजन शुरू होते ही हटा दिया जाता है। अब सिंचाई विभाग को रामगंगा पोषक नहर बंद होने का इंतजार है। इसके अगले ही दिन इस पैंटून पुल को हटा दिया जाएगा। इसके बाद 19 गांवों के हजारों ग्रामीणों को आवागमन में काफी दिक्कतें होंगी।
गजरौला ब्लाक के खादर में स्थित गांव चकनवाला से गुजर रही रामगंगा पोषक नहर पर सिंचाई विभाग ने पैंटून पुल रखा हुआ है। गांव शीशोवाली, दियावली, घेर, लंगड़ेवाली, देववाली, बिसावली, मन्नोवाली, कुएंवाली, मीरापुर, ढाकोवाली, जाटोवाली, पछैलभुड्डी, मंदिर वाली भुड्डी, टीकोवाली, दारानगर, पीपलवाली, देवीवाली, सुल्तानपुर, रंपुरा के ग्रामीण इसी पुल से होकर आते-जाते हैं। इस पुल के हट जाने के बाद इन्हें काफी परेशानियां आती हैं। बाढ़ खंड के जेई वीर सिंह ने बताया कि शीघ्र ही पुल वहां से हटा दिया जाएगा।
जान जोखिम में डालकर गुजर रहे हैं ग्रामीण
गजरौला। इस पुल के हालात काफी खराब हैं। पुल पर लगी बल्लियां उखड़ चुकी हैं। ऊपर बिछी मिट्टी और पुआल गल गई है। पुल पर जगह-जगह गड्ढे उभर आए हैं। पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं है। कारण, नजर बचते ही गंगा में गिरना तय है। पुल की बदहाली का बड़ा कारण वहां से भारी वाहनों का गुजरना है। इन गांवों में फेरी कर सामान बेचने वाले गांव नगलिया निवासी राजवीर ने बताया गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्राली, डीसीएम, पिकअप ओवरलोडेड वाहनों की वजह से ही पुल जगह छोड़ जाता है। देवीवाली निवासी चंद्रवती का कहना है कि यदि गांव वाले विरोध करते हैं तो वाहन चालक लड़ने को तैयार हो जाते हैं।
आवागमन को नाव और डोंगी बनेंगे सहारा
गजरौला। बरसात का सीजन शुरू हो चुका है। गांव चकनवाला में रामगंगा पोषक नहर पर लगा पैंटून पुल भी शीघ्र ही हटने वाला है। इसके बाद चकनवाला के पार स्थित 19 गांवों के ग्रामीणों के लिए नाव और डोंगी ही आवागमन का सहारा बनेंगी। गांव शीशोवाली निवासी द्रोपदी देवी और कुसुम ने बताया कि आने वाले माह हम ग्रामीणों पर काफी भारी गुजरेंगे। कारण, पुल हट जाएगा और फिर नहर को जान जोखिम में डालकर पार करना होगा। सबसे अधिक दिक्कत शाम ढलने के बाद होती है। यदि इन 19 गांवों में कोई हादसा हो जाए तो समय पर मदद भी नहीं मिल पाएगी। क्योंकि रात के समय नाव और डोंगी का संचालन नहीं होता है।