नगर से आठ किलोमीटर दूर सांसद कंवर सिंह तंवर के गोद लिये गांव चकनवाला से सट कर जा रही रामगंगा पोषक नदी पर बने पान्टून पुल हटने से दस से अधिक गांव का संपर्क गजरौला से टूट गया है। इन गांवों के ग्रामीण बाहरी दुनिया से अलग-थलग पड़ गए हैं। लोगों को गजरौला आने के लिए नाव ही एकमात्र सहारा है। जान जोखिम में डालकर नाव से नहर पार कर रहे हैं। ऐसा न हो, लेकिन कोई हादसा होता है तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
हर साल की तरह इस बार भी रामगंगा पोषक नहर के उस पार बसे गांवों के ग्रामीणों शहरी दुनिया से अलग-थलग पड़ गए हैं। कारण है कि पोषक नहर के ऊपर बना पान्टून पुल चार माह के लिए फिर हटा दिया गया।
गांव चकनवाला से सटी राम गंगा पोषक नदी के पार दस से अधिक गांव ऐसे हैं जिन्हें गजरौला या अन्य शहरों में जाने के लिए नदी पार करके गांव चकनवाला होकर ही जाना पड़ता है। नदी पार करने के लिए प्रशासन ने पान्टून पुल की व्यवस्था कर रखी है। बरसात के दिनों में बाढ़ का खतरा बढ़ने पर पान्टून पुल को हटा दिया जाता है। इस साल भी मई माह के अंत में पान्टून पुल हटा कर नदी किनारे रख दिया गया है। जिससे उस पार के गांव का संपर्क टूट गया है। आलम ये है कि नाव के जरिये ग्रामीणों को नदी पार करनी पड़ रही है। बाइकें और भारी सामान भी नाव से ही ले जाया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को खतरा बना रहता है। ग्रामीण के अनुसार पान्टून पुल करीब अक्तूबर बाहर में लगाया जाएगा। तब तक ग्रामीणों को नदी पार करने के लिए नाव का ही सहारा लेना पड़ेगा।