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पान के शौकीन अमरूद-शहतूत के पत्ते पर लगा रहे कत्था-चूना

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अमरेाहा। लॉकडाउन में शौक पूरा करने के लिए लोगों ने विकल्प तैयार कर लिया। अब पान के शौकीनों को ही ले लीजिए। पान की दुकानें बंद है। न तो पान मिल रहा है न ही पत्ते। ऐसे में लोग पान का शौक पूरा करने के लिए अमरूद और सहतूत के पत्तों का सहारा ले रहे हैं। शौकीन अमरूद और सहतूत के पत्तों पर कत्था चूना और लौंग इलाइची लगा कर काम चला रहे है। लंबे समय से पान खाने वाली महिलाएं और पुरुष इस नुख्से का इस्तेमाल कर पान का शौक पूरा कर रहे हैं।
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लॉकडाउन में सिर्फ मेडिकल, डेयरी और किराने की दुकानें ही खुल रही है। वह भी एक निर्धारित अवधि में ही खुल रही हैं। इसके अलावा सब्जी और फल की दुकानें भी खुल रही हैं। धूम्रपान के नाम पर चोरी छिपे गुटखा और सिगरेट तो मिल जा रहा है लेकिन, पान की तलब पूरी नहीं हो पा रही है। पान की दुकानें बंद है। न तो पान मिल पा रहा है और न ही पत्ते का इंतजाम है। जबकि पान के शौकीनों की फेहरिस्त लंबी है। युवा पान की जरूरत को गुटखे से पूरा कर लेते हैं। लेकिन, सालों से पान खाने वाले बुजुर्ग कैसे अपना काम चलाए। ऐसे में पान के शौकीन बुजुर्ग अमरूद और सहतूत के पत्ते को पान के पत्ते के रूप में इस्तेमाल करने लगे हैं। अमरूद और सहतूत के पत्तों पर कत्था, चूना, सौंफ, लौंग, इलाइची लगाकर अपनी पान की तलब को मिटा रहे हैं। हालांकि शौकीनों को इस विकल्प में पान का मजा नहीं मिल रहा है। फिर भी लॉकडाउन में ऐसे जैसे काम चला रहे हैं।
लंबे समय से पान खाती आ रही हूं। लेकिन, लॉकडाउन के दौरान पान नहीं मिल रहा है। पान के पत्ते भी नहीं मिल रहे हैं। मजबूरन शहतूत के पत्ते पर ही कत्थ, चूना लगाकर हड़क मिटा रही हूं। लेकिन, इसमें पान जैसा स्वाद तो नहीं मिल रहा है। फिर भी वर्तमान समय में इससे ही काम चलना पड़ रहा है। - शमशदी
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लॉकडाउन में पान का शौक पूरा नहीं हो पा रहा है। लंबे समय से पान खाने की आदत है। अधिक तलब लगने पर छाली, कत्था, सौंफ आदि से काम चलाना पड़ रहा है। अमरूद के पत्ते को भी पान के रूप में इस्तेमाल करके देखा। लेकिन, रास नहीं आया। - बानो बेगम
लॉकडाउन में पान नहीं मिल रहा है। पान के खोके बंद हो गए। पान मिलना बंद हो गया तो अमरूद के पत्ते पर सफेद इलायची और लौंग रखकर खाने से पान की तलब कम हो जाती है। इससे पहले के मुताबिक स्वास्थ्य भी अच्छा महसूस कर रहा हूं। - जैनुल आबेदीन, मोहल्ला लालबाग, हसनपुर

पहले बिना पान खाये रह नहीं सकते थे। कम से कम एक पान तो शाम के समय जरूर चाहिए था। पान खाने की तलब जब लगती थी इदरीश के पान के खोके की तरफ जाया करते थे। लेकिन, लॉकडाउन में पान का खोका एक बार भी नहीं खुल पाया है। ऐसे में अमरूद के पत्ते पर लौंग, इलायची और मिश्री रखकर खाने से मीठा पान की तबल मिट जाती है। - सिकंदर राही, हसनपुर
गोपाल गुप्ता का कहना है कि पहले पान खाने का शौक था। रोजाना तो नहीं, लेकिन सप्ताह में तीन बार पान जरूर खाया करते थे। अब पान की लत बिल्कुल छूट गई है। पान की जगह अमरूद के पत्ते पर इलायची रखकर खाने से बड़ा अच्छा महसूस होता है। - गोपाल गुप्ता, मोहल्ला राजपूत कालोनी, हसनपुर
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