एक अक्तूबर से धान की खरीद चल रही है। मंडियों में धान खरीद करने वाले आढ़तियों के पास किसानों की कतार लगी हैं, तो वहीं सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों के कम पहुंचने के कारण खरीद की रफ्तार सुस्त है। जिसके चलते जिलेभर में सभी क्रय केंद्रों पर अभी कुल 246.80 क्विंटल धान की खरीद ही हो सकी है।
खाद्य विपणन वर्ष 2024-25 के लिए मूल्य समर्थन योजना के तहत धान जिलेभर में क्रय केंद्र 18 बने हैं। एक अक्तूबर से धान की खरीद भी विधिवत रूप से शुरू कर दी गई है। लेकिन, किसान सरकारी खरीद केंद्रों का रुख न कर मंडी में आढ़तियों के पास अपनी धान उपज की बिक्री कर रहे हैं। जिसके चलते सरकारी केंद्रों पर धान खरीद की रफ्तार सुस्त दिखाई दे रही है। यहीं वजह है कि जिलेभर में 15 दिनों में मंगलवार तक धान की केवल 246.80 क्विंटल खरीद ही हो सकी है।
आढ़तियों पर मिल रहा धान का अच्छा दाम
सरकारी केंद्रों के इतर मंडी में आढ़तियों के पास किसानों को धान का अच्छा दाम मिलना इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है। सरकारी क्रय केंद्रों पर इस बार धान के समर्थन मूल्य में 117 रुपये की वृद्धि की गई है। सामान्य धान 2300 रुपये प्रति क्विंटल जबकि ग्रेड- ए का धान 2320 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। लेकिन बाजार में आढ़तियों के पास 2700 रुपये प्रति क्विंटल तक धान का मूल्य किसानों को मिलना भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
धान में नमी भी कम खरीद का बड़ा कारण
धान खरीद केंद्रों पर किसानों से नमी वाला धान नहीं लिया जाता है। हसनपुर क्षेत्र के गांव बेगपुर मुंडा निवासी किसान महेंद्र सैनी का कहना है कि खरीद केंद्रों पर धान लेकर पहुंचने वाले किसानों को नमी का हवाला देते हुए सूखा धान लाने के लिए कहा जाता है। जबकि, आढ़ती नमी वाले धान को भी खरीद लेते हैं। दाम ठीक मिलने व नमी का वजन कम कर खरीद करने के चलते किसान आढ़तियों के पास धान बेचने का रुख कर रहे हैं।
- अमरोहा के गांव सूदनपुर निवासी कमल सिंह का कहना है कि बाजार में आढ़तियों के पास धान का मूल्य सरकारी एमएसपी से अधिक मिल रहा है। नमी वाला धान भी आढ़ती खरीद रहे हैं। जबकि क्रय केंद्रों पर नमी वाले धान को सुखाकर लाने को बोल दिया जाता है। जिससे किसान सरकारी क्रय केंद्रों के बजाय आढ़तियों की और अधिक रुख कर रहे हैं।
दस हजार मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य
इस बार जिले में बने सभी केंद्रों को धान की खरीद के दस हजार मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया है। 31 जनवरी तक आखिरी तारीख है। अधिकारियों का मानना है कि अभी धान खरीद में रफ्तार आएगी।
एफसीआई के क्रय केंद्र पर नहीं हुई खरीदारी
गजरौला। मंडी समिति में धान के दो खरीद केंद्र हैं। जिनमें एक आरएफसी और दूसरा भारतीय खाद्य निगम का है। भारतीय खाद्य निगम के क्रय केंद्र की धान खरीद में स्थिति बेहद खराब है। मंगलवार दोपहर तक उस पर खरीदारी बिल्कुल भी नहीं की गई। लोगों का कहना है कि केंद्र प्रभारी मंडी में ही नहीं आते। उधर, मंडी समिति में आरएफसी के धान क्रय केंद्र को 10 हजार क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य मिला है, लेकिन उस पर मंगलवार दोपहर तक महज 36 क्विंटल धान खरीदा गया। उधर, आदमपुर के दढियाल, गारवपुर, ढबारसी धान क्रय केंद्रों पर एक दाने की भी तौल नहीं हो सकी है।
- धान की आवक शुरू हो गई है। आढ़तियों के पास बिकने के लिए पहुंच रहा धान बेहतर क्वालिटी का है। जो एमएसपी से ज्यादा रेट पर बिकता है। अभी धान में नमी भी है। 17 फीसदी नमी तक का धान क्रय केंद्रों पर खरीद लिया जाता है। इससे अधिक नमी होने पर धान की नमी को सुखाकर लाने के लिए कहा जाता है। किसानों को लौटाया नहीं जाता है, बल्कि सैंपल के तौर पर पहले ही नमी की जांच कर किसान को धान लाने के लिए बोला जाता है। फसल की रकम भी 24 घंटों के भीतर किसान के खाते में भेज दी जाती है। बरसात अधिक समय तक होने के कारण फिलहाल धान में नमी आ रही है। क्रय केंद्र प्रभारियों को किसानों से संपर्क कर खरीद में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं। - अजय प्रताप सिंह, जिला खाद्य विपणन अधिकारी।