अमरोहा। मौसम की मार ने धान किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी धान की फसल जमीन पर बिछ गई। कहीं फसल गिरने से कटाई में परेशानी हो रही है तो कहीं बालियों में दाने कमजोर पड़ने की शिकायत है। किसानों के सामने फसल समेटने से लेकर उसे बेचने तक का संकट खड़ा हो गया है। मंगलवार को डिडौली क्षेत्र में किसान खेतों में गिरी धान की फसल को सीधा कर कटाई करते नजर आए। किसानों का कहना है कि बारिश ने मेहनत पर पानी फेर दिया है। फसल को संभालने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है, लेकिन उपज अच्छी मिलने की उम्मीद भी कम हो गई है।
जिले में करीब 27 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती की गई है। कृषि विभाग के अनुसार, जिले में लगभग 80 प्रतिशत फसल की कटाई हो चुकी है। पिछले दिनों हुई बारिश और ओलावृष्टि से अमरोहा तहसील क्षेत्र में करीब तीन प्रतिशत नुकसान का आकलन किया गया है। कृषि विभाग ने फसल क्षति का सर्वे कराया है। वहीं हसनपुर, नौगावां सादात और मंडी धनौरा क्षेत्र में ओलावृष्टि नहीं होने के कारण विभाग ने वहां नुकसान से इन्कार किया है।
खेतों में पानी और नमी के कारण किसानों के सामने धान की कटाई और सुखाने की चुनौती है। गीली फसल को लेकर किसान असमंजस में हैं कि उसे कब तक सुखाएं और कैसे सुरक्षित रखें। इसका असर सरकारी खरीद पर भी दिखाई दे रहा है। मंगलवार को धान क्रय केंद्रों पर सन्नाटा पसरा रहा। खेतों में गीली पड़ी फसल के चलते किसान केंद्रों तक धान नहीं पहुंचा पा रहे हैं। किसानों को आशंका है कि मौसम की मार से उपज और गुणवत्ता प्रभावित हुई तो उनकी आमदनी पर भी असर पड़ेगा। ऐसे में किसान अब फसल को बचाने और जल्द कटाई पूरी करने की जद्दोजहद में जुटे हैं। जिला कृषि अधिकारी मनोज कुमार ने बताया कि बारिश ओलावृष्टि की वजह से अमरोहा तहसील में करीब तीन फीसदी नुकसान हुआ है। जिसकी रिपेार्ट शासन को भेजी जाएगी।