अमरोहा। गांव रुद्रपुर निवासी बबीता ने रंजिशन दूसरे पक्ष के लोगों को फंसाने के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दर्ज परिवाद को न्यायालय ने खारिज कर दिया। साथ ही आरोपी महिला के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराने के आदेश दिए हैं।
हसनपुर क्षेत्र के गांव रुद्रपुर निवासी बबीता ने अदालत में परिवाद दायर कर आरोप लगाया था कि 21 अक्तूबर 2025 को बिजली चोरी की घटना की रंजिश के चलते धर्मपाल समेत 11 लोग हथियारों से लैस होकर उसके घर में घुस आए। आरोपियों ने परिवार के साथ मारपीट की, पति रणजीत पर तमंचे से फायर किया। दावा किया था कि घटना में घायल होने के बाद उसका, उसके पति रणजीत और राहुल का हसनपुर के एक निजी अस्पताल में उपचार कराया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने उपचार संबंधी अभिलेखों की सत्यता की जांच कराई। अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राजेश ने न्यायालय में बयान देकर स्पष्ट किया कि बबीता, रणजीत और राहुल का उनके अस्पताल में कभी उपचार नहीं हुआ।
अदालत में प्रस्तुत किए गए बिल और चिकित्सीय दस्तावेज उनके अस्पताल के नहीं हैं तथा उन पर लगी मोहर और हस्ताक्षर भी फर्जी हैं। चिकित्सक ने बताया कि इस संबंध में वह पहले ही थाना हसनपुर में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। सीएमओ की जांच रिपोर्ट में भी 22 से 28 अक्तूबर 2025 के बीच अस्पताल के रजिस्टर में तीनों के उपचार का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
अदालत ने यह भी माना कि घटना से संबंधित दूसरे पक्ष की ओर से पहले ही प्राथमिकी दर्ज कराई जा चुकी थी। उपलब्ध साक्ष्यों से यह प्रथम दृष्टया प्रतीत हुआ कि परिवाद दूसरे पक्ष पर दबाव बनाने और न्यायालय को गुमराह करने के उद्देश्य से दायर किया गया। सभी तथ्यों और जांच रिपोर्ट पर विचार करने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने परिवाद निरस्त कर दिया। साथ ही न्यायालय के कार्यालय लिपिक को बबीता के विरुद्ध न्यायालय में कूटरचित दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं। संवाद