हरिद्वार और ब्रजघाट की तर्ज पर तिगरीधाम में भी पक्के घाट बनाए जाएंगे। इसकी कवायद शुरू हो गई है। महिला व पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग चेंजिंग रूम भी बनेंगे। पक्के घाट बनने से कार्तिक पूर्णिमा के साथ ही अमावस्या व पूर्णिमा पर स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को परेशानी नहीं होगी। इसके लिए कार्यदायी संस्था ने उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कार्पोरेशन ने हाल ही में प्रशासन को 20 करोड़ रुपये की राशि के प्रस्ताव बनाकर भेजे हैं। स्वीकृति मिलने पर पर्यटन विभाग की ओर से राशि जारी की जाएगी।
गजरौला क्षेत्र का तिगरी गांव गंगा किनारे स्थित है, जहां कार्तिक पूर्णिमा पर हर साल लगने वाले गंगा मेले में लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं। वहीं, प्रत्येक माह की अमावस्या व पूर्णिमा पर भी श्रद्धालु गंगा में डुबकी लगाते हैं। मगर, स्नान घाट कच्चे होने के कारण श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिसे दूर करने के लिए गंगा किनारे पक्के स्नान घाट बनाए जाने की मांग कई साल से उठाई जा रही है।
अब इस मांग को अमली जामा पहनाने के लिए उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कार्पोरेशन से प्रस्ताव तैयार किया है। कार्पोरेशन ने करीब 20 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा दिया है। इसके तहत तिगरी में भी हरिद्वार और ब्रजघाट की तर्ज पर 150 मीटर लंबे और 21 मीटर चौड़ाई के पक्के स्नान घाट बनाए जाएंगे। साथ ही महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग चेंजिंग रूम भी बनाए जाएंगे, जिससे उनको कपड़े बदलने में दिक्कत न हो। आरती स्थल भी बनाया जाएगा, जहां रोजाना सुबह-शाम परंपरागत तरीके से मां गंगा की आरती की जाएगी।
पक्के घाट बनने पर यह मिलेगी सहूलियत
- घाट के आगे लोहे की जंजीर और रेलिंग लगाई जाएगी।
- पक्का घाट बनने से तिगरी में गंगा किनारे का कटान रुकेगा।
- हर साल कटान के कारण होने वाले लाखों के नुकसान से राहत मिलेगी।
- कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले गंगा मेले के स्थल में परिवर्तन नहीं होगा।
- भूमि को समतल करने और मार्ग बनाने में खर्च होने वाली लाखों की रकम की बचत होगी।
- गंगा में बाढ़ आने पर होटल, दुकान, खोखे आदि को हटाने की जरूरत नहीं होगी।
- पक्का घाट बन जाने से तिगरी धाम पर्यटन के रूप में विकसित होगा।
- शौचालय बनने से गंगा का किनारा साफ सुथरा रहेगा।
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- तिगरी में गंगा किनारे पक्के स्नान घाट, चेंजिंग रूम, आरती स्थल आदि बनाने के लिए प्रस्ताव बनाकर भेज दिया गया है। इस पर 20 करोड़ रुपये से अधिक का खर्चा आएगा। प्रस्ताव को मंजूरी और धनराशि मिलते ही काम शुरू कर दिया जाएगा। - दीपक शर्मा, प्रबंधक, उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कार्पोरेशन के मैनेजर
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तीसरी कार्यदायी संस्था से बनवाया प्रस्ताव
करीब दो साल पहले मंडी धनौरा विधायक राजीव तरारा की पैरवी पर बाढ़ खंड विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया था। जिसमें गंगा तट पर पांच सौ मीटर लंबा घाट बनना था। जिसकी तली की चौड़ाई 50 मीटर व ऊपर की चौड़ाई 21 मीटर रखी गई थी। इस पर 72 करोड़ रुपये होने थे। प्रस्ताव बनाकर डीएम के माध्यम से शासन को भेजा गया, लेकिन प्रस्ताव पर कोई काम नहीं हो पाया। इसके बाद जिला प्रशासन ने बाढ़ खंड विभाग से पक्के घाट बनाए जाने का जिम्मा छीन लिया और उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) को जिम्मेदारी सौंपी गई। उसने प्रस्ताव में 150 मीटर लंबे पक्के घाट और अन्य सुविधाओं को शामिल करते हुए 2375.65 लाख रुपये खर्च आने का आकलन किया, जिसके बाद शासन को प्रस्ताव भेजा गया। हालांकि, उस पर भी काम आगे नहीं बढ़ पाया। अब उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कार्पोरेशन से भी प्रस्ताव बनवाया है।