अबकी बार कार्तिक पूर्णिमा पर गढ़ और तिगरी में लगने वाले गंगा स्नान मेले का स्वरूप बदला हुआ हो सकता है। मेले की व्यवस्थाएं कैसी रहेंगी, यह तो मेला लगने के बाद ही साफ होगा। लेकिन, इस बार मेला लगाने की जिम्मेदारी जिला पंचायत के कंधों पर नहीं होगी।
हाल ही में सीएम योगी ने गढ़ में लगने वाले गंगा स्नान मेले को राजकीय मेला घोषित किया है। राजकीय मेला हो जाने के साथ ही जिला पंचायत का दखल इस मेले में खत्म हो गया। मेलों की जिम्मेदारी यूं तो जिला पंचायतें ही संभालती हैं लेकिन, गढ़ और तिगरी मेले की व्यापकता को देखते हुए राजकीय मेले का दर्जा मिला है। सूत्रों की मानें तो इस बार इस मेले में व्यवस्थाएं जिला प्रशासन करेगा। या फिर शासन के निर्देश पर मेले की व्यवस्थाएं देखी जाएंगी।
गौरतलब है कि कार्तिक पूर्णिमा पर गढ़ में गंगा के तट पर कुछ दिनों के लिए तंबुओं का शहर बस जाता है। दूर दराज के लोग अपने परिवार सहित यहां आकर गंगा स्नान करते हैं। या यूं कहें कि तीन चार दिन के लिए परिवार वहां बस जाते हैं। गंगा के उस पार गढ़ में लगने वाले मेले की व्यवस्थाएं हापुड़ जिला पंचायत देखती रही है। वहीं, इस तरफ बसने वाले मेले की जिम्मेदारी अमरोहा जिला पंचायत के हवाले होती है। मेले में हैंडपंप, सड़क, रोशनी सहित तमाम व्यवस्थाएं जिला पंचायत की तरफ से होती रही हैं। अब राजकीय मेला बनने के बाद जिला पंचायत इस मेले की व्यवस्थाओं को नहीं देखेगीं। जिला प्रशासन की ओर से ही मेला आयोजित कराया जाएगा। खैर यह वक्त के हवाले होगा कि कौन विभाग या कौन अधिकारी मेला आयोजन की कमान संभालेगा।