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Amroha News: पौष्टिक आहार न उपचार...गोशालाओं में पशु पड़े बीमार

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अमरोहा। सरकार के अथक प्रयासों के बावजूद गोशालाओं में अव्यवस्थाओं का आलम है। पौष्टिक आहार की व्यवस्था तो दूर की बात गोशाला में सूखा भूसा गायों को खिलाया जा रहा है। अधिकांश गोशालाओं में गोवंशीय पशु बीमार हैं। बावजूद इसके उनके उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है।
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अमर उजाला की टीम ने रविवार को गोशालाओं की पड़ताल की तो वहां के हालात बद से बदतर नजर आए। किसी में सफाई नहीं थी तो कहीं पशुओं के पीने के लिए पानी ही गायब था। अधिकांश पशु कमजोर हालत में थे। धूप से बचाव के लिए कोई पर्याप्त साधन। यही वजह है कि 12 जून की शाम हसनपुर की कान्हा गोशाला में सात गोवंशीय पशुओं की मौत हो गई थी। जिम्मेदारों ने मृतक पशुओं के साथ एक जिंदा गाय को भी गड्ढे में दबाने की कोशिश की थी। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया था। मामला शासन तक पहुंचा तो पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह व जिले के नोडल अधिकारी ने भी गोशालाओं का दौरा किया। जिसके बाद डीएम राजेश कुमार त्यागी से लेकर सभी निचले अधिकारी रोजाना गोशालाओं का निरीक्षण कर रहे थे। लेकिन, मामला ठंडा पड़ा तो गोशालाओं की व्यवस्था फिर से बिगड़ गई। मालूम रहे कि जिले में स्थायी और अस्थायी 23 गोशाला हैं। जहां तकरीबन 662 से अधिक गोवंशीय पशु रखे गए हैं।
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कान्हा गोशाला हसनपुर: सुबह 11 बजे:
तीन गाय चल रहीं बीमार
हसनपुर। नगर पालिका द्वारा संचालित कान्हा गोशाला में 284 गोवंशीय पशु संरक्षित हैं। तीन गाय बीमार चल रही हैं। जिनका उपचार किया जा रहा है। यह वही गोशाला है। जहां करीब दस दिन पूर्व बीमारी की वजह से 7 गायों की मौत हो गई थी। एक जीवित गाय को दफनाने का वीडियो भी वायरल हुआ था। घटना की गूंज शासन तक पहुंची थी और पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने गोशाला पहुंच कर जांच पड़ताल की थी। लापरवाही के मामले में एसडीएम को हटा दिया गया था और नगर पालिका के तो को निलंबित कर दिया गया था। इसके अलावा गोशाला प्रभारी समेत पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई थी। इस घटना के बाद से गोशाला में व्यवस्थाएं संतोषजनक हैं। उसकी वजह यह है कि यहां लगातार अधिकारियों की नजर है।
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जोया की कान्हा गोशाला: सुबह 11:35 बजे
गोशाला में क्षमता से अधिक पशु, दो बीमार
जोया। कान्हा गोशाला की क्षमता 80 पशुओं की है। मौके पर 102 पशु मिले। जिसमे दो पशु बीमार चल रहे हैं। उनके उपचार के लिए रोज डॉक्टर आते है। हरा चारे के लिए लगभग 23 बीघा जमीन किराये पर ले रखी है। बावजूद इसके मौके पर पशुओं के आगे सूखा भूसा पड़ा था। संवाद
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गजरौला: दोपहर 12:27 बजे
गोशाला में तीन गाय मिलीं बीमार
गजरौला। नगर पालिका के अधीन कान्हा गोशाला में 230 गोवंशीय पशु हैं। जिनको पानी पिलाने के लिए बड़े ड्रम भरे रहते हैं। पशुओं को तीन बार नहलाया जाता है। सुबह, दोपहर और शाम को नहलाने का दावा है। भूसे के साथ हरा चारा मिलाकर दिया जाता है। इस समय तीन पशु बीमार चल रहे हैं। पशुओं के आगे सूखा भूसा पड़ा हुआ था। अधिकांश गोवंशीय पशु कमजोर थे।
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आदमपुर: दोपहर 2 बजे:
गुरेठा और सांथलपुर गोशाला में पांच गोवंशीय पशु बीमार
आदमपुर। क्षेत्र के गांव गुरेठा में स्थित अस्थाई गोशाला में 65 पशु संरक्षित हैं। जिनमें दो पशु बीमार हैं। पशुओं की देखभाल ठीक से नहीं हो रही है। पशु सूखा भूसा खाने को मजबूर हैं। हरा चारा कभी-कभी मिलता है। उधर, साथलपुर गोशाला में 309 पशु संरक्षित हैं। जिसमें तीन गोवंशीय पशु बीमार मिले। गोशाला के अंदर पशुओं की वास्तविक स्थिति देखने के लिए मीडिया कर्मियों पर पाबंदी लगाई हुई है। बताते हैं की जबसे इस गोशाला में जहरीला चारा खाने से 61 पशुओं की मौत हुई थी। उसके बाद से ही बाहरी व्यक्तियों और मीडिया कर्मियों को भी अंदर नहीं जाने दिया जाता।
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अस्थाई गोआश्रय स्थल: दोपहर 12 बजे:
पशुओं को डाला जा रहा सूखा भूसा
अमरोहा। जिले में गोशालाओं के हालात सुधर नहीं पा रहे हैं। पालिका द्वारा संचालित अस्थाई गोआश्रय स्थल में रविवार को 141 गोवंशीय पशु मौजूद थे। केयर टेकर ने बताया कि सुबह के समय पशु चिकित्सक पशुओं का परीक्षण करके गए हैं। गोशाला में पशुओं को हरा चारा डाले जाने के निर्देशों के बाद भी पशुओं के आगे सूखा भूसा ही डाला गया था। पानी का हौज सूखा पड़ा था।
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याहियापुर कताई मिल गोशाला: दोपहर 12:35 बजे
धूप में बैठे थे गोवंश, नहीं डाला गया था चारा
अमरोहा। याहियापुर स्थित कताई मिल गोशाला में करीब साढ़े चार सौ गोवंशीय पशु मौजूद हैं। गोशाला का संचालन महिला स्वयं सहायता समूह द्वारा किया जाता है। टिनशेड होने के बाद भी दोपहर के समय पशुओं को धूप में बैठे मिले। पशुओं के आगे चारा भी नहीं था। हालांकि, गोशाला में अधिकारियों के निर्देश पर खाली पड़ी जमीन में हरा चारा बोया गया है। लेकिन इसके बाद भी न तो पशुओं के आगे सूखा चारा ही डाला गया था और न ही हरा चारा वहां मौजूद था। यहां पशुओं के लिए हौज में भरा पानी गंदा मिला। गोशाला का संचालन करने वाली समूह की अध्यक्ष ममता ने बताया कि तेज हवा के चलते बिजली का तार टूटने से असुविधा हुई है। दोपहर के समय तक पशुओं के स्वास्थ्य परीक्षण को कोई चिकित्सक भी गोशाला में नहीं पहुंचे थे।
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